म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत
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जिसका ऊँचा बड़ा घराना है (ग़ज़ल) - हमीद कानपुरी
बात करें क्‍या लोकतंत्र की (गीतिका) -आकुल
मौसम भी है बे-मौसम (ग़ज़ल) -यशवंत दीक्षित
इक ज़रा मुस्कुरा के देख लिया (ग़ज़ल) -हमीद कानपुरी
हौसला (मुक्तक) -डॉ अ कीर्तिवर्द्धन,
अच्छे हैं लोग (ग़ज़ल) -हमीद कानपुरी
जीवन क्षणभंगुर है जाने (गीतिका) -आकुल
मुक्तक - यशवंत दीक्षित
विकास ही सर्वोपरि हो ध्येय (गीतिका) -आकुल
चेहरे पे लिखी है कहानी (ग़ज़ल) -कमलेश कंवल
तेरा नाम क्यों है ये बता (ग़ज़ल) -कैलाश सोनी 'सार्थक'
ज़हर है आजकल हवाओं में (ग़ज़ल) -कैलाश मनहर
मौत से नज़रें मिला बैठे हैं हम (ग़ज़ल) -हमीद कानपुरी
नेता बहरा हुआ है (ग़ज़ल) -रमेश मनोहरा
पूछ लिया करते हैं (ग़ज़ल)
दर्द और सघन हो गया (ग़ज़ल) -कमलेश कंवल
आशिक़ हो जाने का मतलब (ग़ज़ल) -प्रदीप ध्रुव भोपाली
कमाना बहुत हुआ (ग़ज़ल) -हमीद कानपुरी
इंसान उत्तम हो (गीतिका) - कैलाश सोनी 'सार्थक'
बन के खुशबू जहाँ में बिखरता हूँ मैं (ग़ज़ल) -डॉ अनिल जैन