साहित्य की सेवा को समर्पित एक सक्रिय व्यक्तित्व : डॉ. विकास दवे साहित्य की दुनिया में कुछ लोग केवल लिखते नहीं हैं, बल्कि साहित्य के लिए वातावरण भी तै…
वर्तमान समय की मांग और भविष्य की जरूरत के लिए हिंदी को तकनीकी के साथ जोड़ना जरूरी - डॉ. धनजी प्रसाद भोपाल।'हिंदी भाषा शिक्षण को स्किल की तरह पढ़ा…
डॉ. विकास दवे तीसरी बार मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक मनोनीत भोपाल/उज्जैन। मध्यप्रदेश के साहित्यिक जगत के लिए महत्वपूर्ण खबर है कि वरिष्ठ साहित…
प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा ‘हिंदी भाषा, राजभाषा से राष्ट्रभाषा’ विषय पर विमर्श और काव्य गोष्ठी आयोजित उज्जैन। हम आज हिंदी को राजभाषा या राष्ट्रभाषा कहल…
हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में दक्षिण भारत के साहित्यकारों का उल्लेखनीय योगदान : प्रो. बी.एल. आच्छा भोपाल। वरिष्ठ साहित्यकार एवं चेन्नई निवासी प्रो.…
अंग्रेजी हटाओ नहीं, हिंदी अपनाओ आंदोलन की जरूरत : डॉ. विकास दवे भोपाल। “आज हमें अंग्रेजी हटाओ नहीं, बल्कि हिंदी अपनाओ आंदोलन की जरूरत है। हमारा किसी …
साहित्यकार ईश्वर को रिटर्न गिफ्ट देते हैं : डॉ. विकास दवे हिंदी के तपस्वी साहित्यकार प्रो. बी.एल. आच्छा दिनकर प्रतीक सोनवलकर सम्मान से विभूषित उज्जैन…
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