अंग्रेजी हटाओ नहीं, हिंदी अपनाओ आंदोलन की जरूरत : डॉ. विकास दवे
भोपाल। “आज हमें अंग्रेजी हटाओ नहीं, बल्कि हिंदी अपनाओ आंदोलन की जरूरत है। हमारा किसी भाषा से कोई द्वेष नहीं है, लेकिन हमें अपनी बोलियों और भाषाओं की चिंता करना ही होगी। इसके लिए अपनी भाषाओं के प्रति गौरवबोध होना आवश्यक है।” यह विचार मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, हिंदी भवन भोपाल के मंत्री-संचालक डॉ. विकास दवे ने व्यक्त किए। वे लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल द्वारा ऑनलाइन आयोजित हिंदी पखवाड़े के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे।
कार्यक्रम के आरंभ में लघुकथा शोध केंद्र समिति की निदेशक कांता रॉय ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा आधार वक्तव्य में आयोजन के उद्देश्य और रूपरेखा पर प्रकाश डाला। डॉ. ममता माली, मुंबई और चित्रा राघव राना के संचालन में कार्यक्रम आगे बढ़ा। सारस्वत अतिथि एवं वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार तथा ‘वीणा’ पत्रिका के संपादक डॉ. राकेश शर्मा ने कहा कि हिंदी के समक्ष चुनौतियां समाप्त नहीं हुई हैं, बल्कि पहले से अधिक बढ़ी हैं। हिंदी के विकास के लिए हिंदी के मानकीकृत अंकों और लिपि का प्रचार-प्रसार आवश्यक है।
पूर्व सांसद एवं मानस भवन भोपाल के कार्यकारी अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा कि हिंदी के लिए आज चिंता और चिंतन दोनों जरूरी हैं। हिंदी के सबसे बड़े शत्रु आज हिंदी वाले ही हैं। हम आज तक हिंदी के संवैधानिक नियमों का भी पालन नहीं करवा पाए हैं। कार्यक्रम के अंत में लघुकथा शोध केंद्र समिति के महासचिव घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ ने सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हिंदी को अपने सम्मान से जोड़ते हुए उसे सहज रूप से अपनाने का अनुरोध किया। आयोजन में देश-विदेश के अनेक हिंदीप्रेमी ऑनलाइन उपस्थित रहे।


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