म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

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उपन्यास जिंदगी की धूप छांव का लोकार्पण
लेखक को संयम और ठहराव के साथ लिखना चाहिए : प्रेम जनमेजय
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श्रेष्ठ व्यंग्य वही है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाए- डॉ. प्रेम जनमेजय
पाठक को बेचैन करता है व्यंग्य, विचार भी देता है : डॉ. प्रेम जनमेजय
भावसार बा स्मृति समारोह में भाषा के अस्तित्व, संवर्धन और नई पीढ़ी से जुड़ाव पर मंथन
प्रेमचंद सृजन पीठ का व्यंग्य विमर्श और पुस्तक लोकार्पण 23 अक्टूबर को