बच्चों को पढ़ने का संस्कार देना बड़ों का दायित्व – डॉ. ऋचा शर्मा भोपाल। बच्चे बड़ों का अनुकरण करते हैं इसलिए बच्चे क्या कर रहे हैं उससे ज्यादा जरूरी …
तीसरी बार साहित्य अकादमी निदेशक बनने पर डॉ.विकास दवे का सम्मान भोपाल। साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद भोपाल द्वारा डॉ विकास दवे को तीसरे कार…
अपनी भाषा और बोलियों को संरक्षित करने के लिए उनका डिजिटलाइजेशन जरूरी : डॉ. सी. जयशंकर बाबू भोपाल। सूफी संतों का हिंदी भाषा के लिए सबसे बड़ा अवदान यह …
साहित्य की सेवा को समर्पित एक सक्रिय व्यक्तित्व : डॉ. विकास दवे साहित्य की दुनिया में कुछ लोग केवल लिखते नहीं हैं, बल्कि साहित्य के लिए वातावरण भी तै…
वर्तमान समय की मांग और भविष्य की जरूरत के लिए हिंदी को तकनीकी के साथ जोड़ना जरूरी - डॉ. धनजी प्रसाद भोपाल।'हिंदी भाषा शिक्षण को स्किल की तरह पढ़ा…
डॉ. विकास दवे तीसरी बार मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक मनोनीत भोपाल/उज्जैन। मध्यप्रदेश के साहित्यिक जगत के लिए महत्वपूर्ण खबर है कि वरिष्ठ साहित…
प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा ‘हिंदी भाषा, राजभाषा से राष्ट्रभाषा’ विषय पर विमर्श और काव्य गोष्ठी आयोजित उज्जैन। हम आज हिंदी को राजभाषा या राष्ट्रभाषा कहल…
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