संस्कृति भाषा के बिना जीवित नहीं रह सकती : विनोद कुमार जैन भोपाल। संस्कृति भाषा के साथ जीवित रहती है। यदि भाषा पर संकट आया तो संस्कृति, संस्कार और पह…
आयु के साथ अनुभव समृद्ध वरिष्ठजनों से युवा पीढ़ी सीखे - डॉ. विकास दवे भोपाल। ‘आयु के साथ अनुभव समृद्ध वरिष्ठजनों को हम बोझ न समझें। हमें, खासकर युवा …
डॉ. जमड़ा की पुस्तक मैं नरमही का पुण्य सलिला मही के मध्य नाव में विमोचन सुखेड़ा। विश्व कृतज्ञता दिवस के अवसर पर मही नदी की काव्यात्मक अभिव्यक्ति को प…
बच्चों को पढ़ने का संस्कार देना बड़ों का दायित्व – डॉ. ऋचा शर्मा भोपाल। बच्चे बड़ों का अनुकरण करते हैं इसलिए बच्चे क्या कर रहे हैं उससे ज्यादा जरूरी …
तीसरी बार साहित्य अकादमी निदेशक बनने पर डॉ.विकास दवे का सम्मान भोपाल। साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद भोपाल द्वारा डॉ विकास दवे को तीसरे कार…
अपनी भाषा और बोलियों को संरक्षित करने के लिए उनका डिजिटलाइजेशन जरूरी : डॉ. सी. जयशंकर बाबू भोपाल। सूफी संतों का हिंदी भाषा के लिए सबसे बड़ा अवदान यह …
साहित्य की सेवा को समर्पित एक सक्रिय व्यक्तित्व : डॉ. विकास दवे साहित्य की दुनिया में कुछ लोग केवल लिखते नहीं हैं, बल्कि साहित्य के लिए वातावरण भी तै…
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