स्मृति शेष : व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी देश के जाने माने प्रतिष्ठित व्यंग्यकार श्री गोपाल चतुर्वेदी जी का 84 वर्ष की आयु में 24 जुलाई की रात को लखनऊ …
जब हम छोटे थे तो माँ बच्चों को घर से बाहर अकेले जाने को मना करती थी कि कोई अगुआ कर लेगा या उठा ले जाएगा। गांवों में भी भरी दोपहर में अपहरण की ऐसी घटन…
प्रत्येक शहर, गाँव, मोहल्ले, कालोनी, सोसाइटी में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सब कुछ पहले से जानते हैं। किसी भी घटना-दुर्घटना अच्छे-बुरे प्रसंग में उनका ए…
इतनी आँखें नहीं है, दुनिया में जितने चेहरे है, तेरे चेहरे में, हम तुझे देख ही नहीं पाए, इतनी नजरें थी तेरे चेहरे पर...आजकल के दौर में जहाँ किसी को कि…
गांधीजी के तीन बंदर थे, जिनकी यह खासियत थी कि वे अपने अपने निर्धारित काम करते थे। एक का काम था बुरा नहीं देखना। दूसरे का काम था बुरा नहीं सुनना और ती…
अब आपसे क्या छिपाना, जो सच है वो तो बताना ही पड़ेगा न..! वरना आप मेरे बारे में पता नहीं क्या क्या धारणा बना लेंगे। तो मैं अपने बारे में बता रहा था कि…
मेरा भोला मुझे बहुत प्यारा है। घर में मेरी और उसकी स्थिति एक जैसी है। परिवार के अन्य सदस्यों की दृष्टि में वह अनुपयोगी सदस्य के रूप में पहचाना जाता ह…
जूते और किताब में से महत्वपूर्ण कौन है, यह निर्णय कर पाना बड़ा कठिन है। किसी को जूते की आवश्यकता है तो किसी को किताब की। यदि किसी को दोनों में से किस…
आपने शायद ही किसी सुखी आदमी को देखा होगा, लेकिन मैंने देखा है और देख कर आश्चर्यचकित भी हुआ। मेरे लिए यह संसार का नवां या दसवां आश्चर्य था। मैं सोच …
जहां से पार्टी मुझे आदेश देगी, मैं वहीं से चुनाव लडूंगा। वास्तविकता - लेकिन अपनी पसंद की जगह से चुनाव लड़ने के लिए, अंतिम दम तक संघर्षरत रहूंगा। म…
पढ़ाई समाप्त करते ही मेरे सामने मुसीबतों का पहाड़ गिर पड़ेगा, काश ! यह जानता तो शायद हर वर्ष परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए भागीरथ प्रयास न करता …
देश आजाद हुआ। हम आजाद हुए। देश में विकास का पहिया घुमने लगा। सभी क्षेत्रों की तरह देश में भ्रष्टाचार ने भी गति पकड़ा। प्रारम्भ के कुछ वर्ष तक इसकी गति…
सुबह होते ही चिड़ियों की सुरीली चहक के साथ श्रीमतीजी की कर्कश आवाज सुनायी पड़ती है- ‘अजी सुनते हो?’ मैं कुछ उत्तर दूँ कि इसके पहले ही वह अपना आदेश भी उ…
प्राथमिक कक्षा में हमने हिन्दी व्याकरण पढ़ी थी, संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण, अलंकार वगैरह। मेरे हिन्दी के गुरु जी, आजकल जब पत्रा पत्रिकाओं में मेर…
मैं कभी-कभी बगीचे मे घूमने चला जाता हूँ। वहां कुछ देर चहल कद़मी करता हूं। फूलों और पेड़ों को देखता हूँ। हरियाली को निहारता हूं और बच्चों को वहां खेलत…
लेखकों के विचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है ©️ 2020-21Shabd pravah सर्वाधिकार सुरक्षित Email- shabdpravah.ujjain@gmail.com