डॉ. विकास दवे तीसरी बार मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक मनोनीत
भोपाल/उज्जैन। मध्यप्रदेश के साहित्यिक जगत के लिए महत्वपूर्ण खबर है कि वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार और बाल साहित्यकार डॉ. विकास दवे को तीसरी बार मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक पद पर मनोनीत किया गया है। लगातार तीसरी बार उन्हें यह जिम्मेदारी मिलना उनके साहित्यिक अनुभव और अकादमी के साथ उनके लंबे कार्यकाल को रेखांकित करता है।
डॉ. विकास दवे ने वर्ष 2020 में पहली बार मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक का पद संभाला था। वर्ष 2023 में उन्हें पुनः इस पद पर मनोनीत किया गया। प्रकाशित समाचारों के अनुसार, उनका दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उन्हें पुनः जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले अकादमी के निदेशक पद पर विभिन्न प्रशासनिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोग रहे हैं। डॉ. दवे के कार्यकाल में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी की ओर से विभिन्न विषयों पर व्याख्यानमालाओं, संगोष्ठियों और साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अकादमी के आधिकारिक अभिलेखों में महर्षि जाबालि व्याख्यानमाला, महर्षि जमदग्नि प्रसंग और राजा भर्तृहरि के लोक चिंतन जैसे कार्यक्रम दर्ज हैं। इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय साहित्य, संस्कृति, दर्शन और लोकचिंतन से जुड़े विषयों पर विद्वानों को संवाद का मंच मिला।
अकादमी की पुरस्कार और रचना-प्रोत्साहन संबंधी गतिविधियां भी उनके कार्यकाल में निरंतर संचालित हुईं। अकादमी द्वारा प्रादेशिक और अखिल भारतीय स्तर पर कृति पुरस्कार, पांडुलिपि अनुदान तथा साहित्यकारों से संबंधित विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती रही हैं। इससे प्रदेश के स्थापित रचनाकारों के साथ नई पीढ़ी के लेखकों को भी मंच मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
डॉ. दवे की साहित्यिक दृष्टि का एक महत्वपूर्ण पक्ष नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना भी रहा है। अकादमी की ‘प्रदेश के लेखक की प्रथम कृति प्रकाशन योजना’ के अंतर्गत नए लेखकों की कृतियों को प्रकाशन का अवसर दिए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से सामने आई है। यह पहल उन रचनाकारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें अपनी पहली पुस्तक के प्रकाशन के लिए मंच और सहयोग की आवश्यकता होती है। अकादमी की विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में साहित्यिक संवाद को बढ़ाने का प्रयास भी किया गया है। राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के अन्य शहरों में आयोजित व्याख्यान और साहित्यिक कार्यक्रम इस व्यापक गतिविधि का हिस्सा रहे हैं।
डॉ. विकास दवे की व्यक्तिगत साहित्यिक यात्रा भी व्यापक रही है। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध उनके परिचय के अनुसार उन्होंने हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल. तथा बाल पत्रकारिता में पीएच.डी. की है। उनके नाम से अनेक पुस्तकें प्रकाशित हैं और विभिन्न विषयों पर 50 से अधिक शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी रचनाएं देश की अनेक प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। अकादमी के आधिकारिक परिचय में उनके बारे में एक हजार से अधिक रचनाओं के प्रकाशन तथा देशभर की प्रतिष्ठित व्याख्यानमालाओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में 1500 से अधिक व्याख्यान देने का उल्लेख है। आकाशवाणी से भी उनकी बालकथाओं और वार्ताओं के अनेक प्रसारण हुए हैं।
डॉ. दवे का साहित्यिक कार्य केवल अकादमिक और वयस्क साहित्य तक सीमित नहीं रहा। वे बाल साहित्य और बाल पत्रकारिता के क्षेत्र में भी लंबे समय से सक्रिय हैं। ‘देवपुत्र’ बाल पत्रिका के संपादन से उनका विशेष जुड़ाव रहा है। एक प्रकाशित परिचय के अनुसार उनके संपादकत्व में ‘देवपुत्र’ ने देश की सर्वाधिक प्रसार संख्या वाली बाल पत्रिकाओं में स्थान बनाया। बाल साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को अनेक सम्मानों से भी मान्यता मिली है। अकादमी की वेबसाइट पर उपलब्ध परिचय में बाल साहित्य प्रेरक सम्मान, बाल साहित्य जीवन गौरव सम्मान सहित विभिन्न साहित्यिक और पत्रकारिता संबंधी सम्मानों का उल्लेख है।
डॉ. दवे ने साहित्य के साथ पत्रकारिता, शोध और सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर भी लेखन किया है। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में सामाजिक समरसता, भारतीय चिंतन, स्वदेशी शिक्षा, गो-संस्कृति, बाल साहित्य, स्वतंत्रता आंदोलन और बाल पत्रकारिता जैसे विविध विषय शामिल हैं। उनकी कई रचनाएं पाठ्यपुस्तकों में भी शामिल की गई हैं। उनका लेखन विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ है और उन्होंने हिंदी पत्रकारिता तथा बाल पत्रकारिता से जुड़े विषयों पर शोध भी किया है। इसके अलावा वे केंद्र सरकार के इस्पात मंत्रालय की केंद्रीय हिंदी सलाहकार समिति सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं पाठ्यक्रम संबंधी समितियों से भी जुड़े रहे हैं।
वर्ष 2023 में दूसरी बार निदेशक बनाए जाने के समय प्रकाशित रिपोर्टों में उल्लेख किया गया था कि डॉ. दवे को लगातार दो कार्यकाल मिलने से वे अकादमी के निदेशक पद पर छह वर्ष का कार्यकाल पाने वाले पहले व्यक्ति बने। अब तीसरी बार मनोनयन के साथ उनके अकादमी से जुड़ाव का क्रम और आगे बढ़ गया है। तीसरी बार जिम्मेदारी मिलने के साथ डॉ. दवे के सामने मध्यप्रदेश की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने, स्थापित रचनाकारों के साथ नए लेखकों को मंच देने और साहित्यिक गतिविधियों को प्रदेश के विभिन्न अंचलों तक विस्तार देने की जिम्मेदारी रहेगी। अकादमी की पुरस्कार योजनाओं, प्रकाशन गतिविधियों, व्याख्यानमालाओं और साहित्यिक आयोजनों को आगे बढ़ाना भी उनके आगामी कार्यकाल के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहेगा।
डॉ. विकास दवे के पुनर्मनोयन पर साहित्य जगत से जुड़े लोगों ने कहा कि उनके अनुभव का लाभ मध्यप्रदेश की साहित्यिक गतिविधियों को मिलेगा। साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने उन्हें तीसरी बार मिली जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दी हैं।


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