म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

हिंदी के तपस्वी साहित्यकार प्रो. बी.एल. आच्छा दिनकर प्रतीक सोनवलकर सम्मान से विभूषित

साहित्यकार ईश्वर को रिटर्न गिफ्ट देते हैं : डॉ. विकास दवे
हिंदी के तपस्वी साहित्यकार प्रो. बी.एल. आच्छा दिनकर प्रतीक सोनवलकर सम्मान से विभूषित

उज्जैन। ईश्वर दो झोलियां लेकर चलता है। एक में दुख और दूसरी में सुख होता है। प्रत्येक मनुष्य को ईश्वर उपहार देता है और साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से ईश्वर को रिटर्न गिफ्ट देते हैं। पं. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने पुत्री सरोज के असामयिक निधन पर ‘सरोज स्मृति’ जैसी कालजयी रचना की। इसी तरह जगजीत सिंह ने पुत्र की असामयिक मृत्यु के बाद कहा था कि वे गायिकी बंद नहीं करेंगे, बल्कि अब उनकी आवाज में और अधिक मर्म होगा। उनकी गायिकी और प्रभावशाली हुई। पंकजा सोनवलकर ने भी अपने रचना संसार और हिंदी से मराठी अनुवाद के माध्यम से ईश्वर को रिटर्न गिफ्ट दिया है। यह बात साहित्यिक अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक डॉ. विकास दवे ने दिनकर सृजन संस्थान द्वारा सामाजिक विज्ञान शोध संस्थान भरतपुरी में 13 सितम्बर 2026 को आयोजित दिनकर प्रतीक सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही।

जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय ने कहा कि व्यक्ति का व्यक्तित्व स्वयं उसके कर्मों से निर्धारित होता है। दिनकर सोनवलकर को सरस्वती का वरदान प्राप्त था। वे कल भी प्रासंगिक थे और आज भी प्रासंगिक हैं। उनके व्यक्तित्व में आत्मीयता, मार्गदर्शन, अंतरंगता और प्रेम स्पष्ट दिखाई देता था। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि दिनकर सोनवलकर का व्यक्तित्व फक्कड़ प्रकृति का था। उनके साहित्य में युद्ध और बुद्ध दोनों को महसूस किया जा सकता है। 


वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि कृतज्ञ होना मनुष्य की पहचान है। उन्होंने दिनकर सोनवलकर के साथ अनेक कवि सम्मेलनों में सहभागिता को स्मरण करते हुए उनकी रचनाओं को वर्तमान संदर्भों से जोड़ा तथा प्रतीक सोनवलकर के प्रशासनिक एवं साहित्यिक व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों को रखा। आईएएस डॉ. एम.बी. ओझा ने कहा कि सोनवलकर कोमल हृदय, कवि हृदय और साहित्य हृदय व्यक्ति थे। अच्छे लोगों की भगवान परीक्षा लेता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अशोक कुमार भार्गव ने कहा कि प्रतीक सोनवलकर ईमानदार और मनीषी जीवन जीने वाले व्यक्ति रहे हैं। उन्होंने प्रशासनिक दायित्वों के साथ मानवीय मूल्यों को महत्वपूर्ण माना। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. पंकजा सोनवलकर ने स्वागत वक्तव्य दिया।

साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए चेन्नई के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. बी.एल. आच्छा को दिनकर प्रतीक सोनवलकर सम्मान से विभूषित किया गया। डॉ. विकास दवे ने दिनकर सोनवलकर को स्मरण करते हुए कहा कि वे मुकेश के गीत गाते हुए छंद में अपना अंतरा जोड़कर सुना देते थे। प्रतीक सोनवलकर के समय दिनकर संस्थान द्वारा दिनकर सम्मान दिया जाता था, अब दिनकर प्रतीक सम्मान की परंपरा आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी के तपस्वी साहित्यकार प्रो. बी.एल. आच्छा को यह सम्मान प्रदान किया जाना संतोष का विषय है। इस अवसर पर दिनकर संस्थान के स्व. अजय तिवारी के सुपुत्र अनुराग तिवारी का भी सारस्वत सम्मान किया गया।


समारोह में डॉ. पंकजा सोनवलकर द्वारा रचित ‘महासमर की अग्निधर्माएं’, प्रतीक सोनवलकर रचित ‘समर्पण’ तथा हिंदी से मराठी में अनूदित काव्य संग्रह का अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। डॉ. हरीश कुमार सिंह ने पंकजा सोनवलकर की पुस्तक ‘महासमर की अग्निधर्माएं’ का परिचय दिया, जबकि दीक्षा सोनवलकर ने अनूदित पुस्तकों का परिचय प्रस्तुत किया। आयोजन में जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पांखुरी जोशी ने किया तथा आभार सार्थक सोनवलकर ने व्यक्त किया।

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