स्मृति शेष : व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी देश के जाने माने प्रतिष्ठित व्यंग्यकार श्री गोपाल चतुर्वेदी जी का 84 वर्ष की आयु में 24 जुलाई की रात को लखनऊ …
जब हम छोटे थे तो माँ बच्चों को घर से बाहर अकेले जाने को मना करती थी कि कोई अगुआ कर लेगा या उठा ले जाएगा। गांवों में भी भरी दोपहर में अपहरण की ऐसी घटन…
प्रत्येक शहर, गाँव, मोहल्ले, कालोनी, सोसाइटी में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सब कुछ पहले से जानते हैं। किसी भी घटना-दुर्घटना अच्छे-बुरे प्रसंग में उनका ए…
इतनी आँखें नहीं है, दुनिया में जितने चेहरे है, तेरे चेहरे में, हम तुझे देख ही नहीं पाए, इतनी नजरें थी तेरे चेहरे पर...आजकल के दौर में जहाँ किसी को कि…
गांधीजी के तीन बंदर थे, जिनकी यह खासियत थी कि वे अपने अपने निर्धारित काम करते थे। एक का काम था बुरा नहीं देखना। दूसरे का काम था बुरा नहीं सुनना और ती…
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