आज उस पर लगा निशाना है। जिसका ऊँचा बड़ा घराना है। साथ मिलकर सभी बढ़ें आगे, मुल्क अच्छा अगर बनाना है। बुग़्ज़कीना की बाँधकर गठरी, जा के गहरे कहीं …
(छंद- ताटंक) बात करें क्या लोकतंत्र की, इसके खेल निराले हैं। लोकलाड़ले नेता सब जनता के देखे-भाले हैं।1। सुख-सुविधा सम्पन्न राष्ट्र हो, सर्वोपरि ज…
खुशियां हो या होवे ग़म. सूख रहे दिल के मौसम. चल जाए कब कैसी हवा मौसम भी है बे-मौसम. बन जाती राहें आसान हिम्मत का धरकर परचम. …
इक ज़रा मुस्कुरा के देख लिया। सब की नज़रें बचा के देख लिया। उस पे होता नहीं असर कुछ भी, अपना सबकुछ लुटा के देख लिया। इक रत्ती मदद न क…
टनल में फँसे मज़दूरों, बचाने के प्रयास में लगे सभी लोगों को समर्पित हौसलों की बात, बस हौसलों से कीजिए, बातों में बुज़दिली, अपनी न आने दीजिए। जीवन मरण…
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