म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

कश्मीर के बौद्धिक परिवेश में उद्भट का योगदान अद्वितीय - प्रो. त्रिपाठी

कश्मीर के बौद्धिक परिवेश में उद्भट का योगदान अद्वितीय -प्रो. त्रिपाठी

उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला एवं प्रातिशाख्य परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी व्याख्यानमाला एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘आचार्य उद्भट : उत्कृष्ट कवि और उद्भट आचार्य’ रहा। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी ने कहा कि आठवीं शताब्दी के कश्मीर के बौद्धिक परिवेश में साहित्य चिंतक उद्भट का योगदान अद्वितीय है और उनके आचार्यत्व को नए सिरे से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने उद्भट के कवि, नाट्यशास्त्र के आचार्य, टीकाकार और मौलिक काव्यशास्त्री के रूपों की चर्चा करते हुए उन्हें महान काव्यशास्त्री एवं अलंकारवादी आचार्य निरूपित किया।

प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि उद्भट का भामह-विवरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अभाव में भामह के ‘काव्यालंकार’ के महत्व को आज समझ पाना कठिन होता। उन्होंने आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी के काव्यशास्त्रीय अवदान और उद्भट पर किए गए महत्वपूर्ण कार्यों को भी रेखांकित किया। अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलपति प्रो. बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि उद्भट ने अपने पूर्ववर्ती आचार्यों से प्रेरणा ली और बाद के आचार्यों को भी प्रभावित किया। उन्होंने अलंकार को भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए उद्भट के योगदान की चर्चा की।

कुलानुशासक एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि उद्भट ने अलंकारों के सुव्यवस्थित विवेचन के साथ भरतमुनि के आठ रसों के अतिरिक्त शांत रस को नौवें रस के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन नगर उज्जैन भारतीय काव्यशास्त्र की परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। कार्यक्रम में आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी की पुस्तक ‘भारतीय साहित्य दर्शन’ का लोकार्पण किया गया। प्रो. जगदीशचन्द्र शर्मा ने आचार्य त्रिपाठी के काव्यशास्त्रीय चिंतन और भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र पर उनके गहरे अध्ययन को रेखांकित किया।

संस्कृत एवं संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पूर्व कुलपति प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी को शॉल, श्रीफल, मौक्तिक माला एवं साहित्य भेंट कर आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी सारस्वत सम्मान से अलंकृत किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर डॉ. विभा द्विवेदी, श्री अमिताभ त्रिपाठी, अरुणाभ त्रिपाठी, डॉ. देवकरण शर्मा, डॉ. उर्मि शर्मा, डॉ. सत्यवती त्रिपाठी, डॉ. वंदना त्रिपाठी, डॉ. प्रेमलता चुटैल, डॉ. गीता नायक, डॉ. अरुण वर्मा, राजेश सक्सेना, संतोष सुपेकर, डॉ. पूजा उपाध्याय, डॉ. प्रीति जोशी, डॉ. नेत्रा रावणकर, डॉ. महेंद्र पंड्या, डॉ. विष्णुप्रसाद मीणा सहित साहित्यकार, शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। संचालन प्रो. जगदीशचन्द्र शर्मा ने किया तथा आभार डॉ. संतोष पंड्या ने माना।

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