पहाड़ों से उतरकर - ज़मीं पर आई ठंड । सन्दूक से निकलकर - बाहर आए स्वेटर । मौजे , टोपे , मफ़लर - कांपे कम्बल थर-थर । आतंक अब ज़मीं पर - खूब मचा रही ठंड…
उच्च हिमालय बहती नदियां कल कल करती झरनों की आवाजें फैली हरियाली ,सुगंधित सुमन महके समीर,बहकी कलियाँ ऐसी गोद हिमाचल की जय जय जय हिमाचल की। ऊंचे वृक्ष,…
याद तुम्हारी मैं बन पाता तो जीवन जीवन होता। मुझे बुलाती ख़्वाबों में तुम अपना मधुर मिलन होता। रोज मुझे तुम लिखती पाती उसमें सब सपने लिखती। जितने ख्व…
प्रिय! बगिया तुम बिन सूनी है कली-कली सकुचाई हैं । मुँह ढाॅंपें बैठी है कोयल, याद तुम्हारी आई है । पायल की रुनझुन-रुनझुन आंगन ने है सुनी नहीं कल्पनाओ…
मतदान का फ़िर पर्व आया । उत्साह सबके मन में छाया । मतदान सभी को करना है । ईमानदार को चुनना है । देशहित का जो काम करे - …
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