ज्योति जैन की चार पुस्तकों का भव्य लोकार्पण, रचनाकर्म पर हुई सार्थक परिचर्चा
इंदौर। शहर की सुप्रसिद्ध लेखिका ज्योति जैन की चार पुस्तकों का लोकार्पण एवं परिचर्चा समारोह शिवना प्रकाशन के तत्वावधान में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में साहित्यकारों, समीक्षकों और प्रबुद्धजनों ने लेखिका के रचनाकर्म तथा उनकी पुस्तकों के विविध पक्षों पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारती भाटे के वंदे मातरम् गान, दिव्या मंडलोई की सरस्वती वंदना और अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत वक्तव्य में पंकज सुबीर ने अतिथियों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का स्वागत करते हुए ज्योति जैन को 'सुपर वूमन' बताया। उन्होंने कहा कि चूल्हे-चौके की जिम्मेदारियों के साथ साहित्य सृजन के क्षेत्र में उनकी सक्रियता प्रेरणादायी है। उन्होंने इंदौर से बड़ी संख्या में पहुंचे साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति की भी सराहना की।
इस अवसर पर ज्योति जैन की चार कृतियों 'घूरना मना है', 'मूँडो देखी ने तिलक काढ़े', 'षष्ठीपूर्ति' और 'प्रतिनिधि कहानियाँ' का अतिथियों ने लोकार्पण किया। उल्लेखनीय है कि लेखिका ने अपनी चारों पुस्तकों को अपने नातिनों और नातियों को समर्पित किया है।
लेखिका ज्योति जैन ने अपनी रचना प्रक्रिया के अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां उपस्थित सभी लोग उनके लिए ब्रह्मांड के सितारे और नक्षत्र हैं। इन्हीं के स्नेह और आशीर्वाद ने उन्हें 'ज्योति' बनाया है। उन्होंने लेखन को साधना बताते हुए समय के सम्मान और रचनात्मक अनुशासन की आवश्यकता पर बल दिया। अपने व्यंग्य लेखन की शुरुआत से जुड़े संस्मरण भी सुनाए। पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया की सहजता का उल्लेख करते हुए उन्होंने शेर पढ़ा-'था नहीं उसे अपने कद का अंदाज, आसमाँ है वो सिर झुकाए बैठा है।' उन्होंने आयोजन के लिए शिवना प्रकाशन के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने ज्योति जैन को चार साहित्यिक संततियों के जन्म की बधाई देते हुए कहा कि खचाखच भरा सभागार स्नेह की विजय का पर्व है। उन्होंने लेखिका की 'नजरबट्टू', 'शिरीन', 'इफ यू लव समबडी', 'घूरना मना है' और 'साड़ी बुला रही है' जैसी रचनाओं का उल्लेख करते हुए उनके साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डाला। मालवी संग्रह के लिए विशेष बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए साहित्य सृजन करना प्रशंसनीय है।
समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध आलोचक एवं व्यंग्यकार बी.एल. आच्छा ने की। उन्होंने पुस्तकों की विषयवस्तु और रचनात्मक गहराई पर विचार रखते हुए कहा कि व्यंग्य विधा केवल आलोचना नहीं, बल्कि तर्क का विषय है। उन्होंने लेखिका की लघुकथाओं में अंतर्मन को स्पर्श करने वाली संवेदना की सराहना की। उनका कहना था कि जीवन को बोनसाई करने की नहीं, बल्कि छांह देने की जरूरत है।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया का स्वागत लेखिका ज्योति जैन ने स्वयं किया। अन्य अतिथियों का स्वागत शरद कुमार जैन, अमर कौर चड्ढा, महेंद्र जैन, वैजयंती दाते, राजेंद्र कुमार तिवारी और डॉ. शोभा प्रजापति ने किया।समारोह में हेमंत बड़जात्या, चेतन कुसुमाकर और विजयलक्ष्मी ने अतिथियों एवं सहयोगियों को स्मृति चिह्न भेंट किए। वहीं ज्योति जैन ने भारती भाटे, दिव्या मंडलोई और कार्यक्रम का सफल संचालन करने वाली स्मृति आदित्य को स्मृति चिह्न प्रदान किए। अंत में स्वर्णिम माहेश्वरी ने आभार व्यक्त किया। समारोह में शहर के अनेक साहित्यकारों, गणमान्य नागरिकों और साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति रही।


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