म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

बाल रचनात्मक अभिव्यक्ति कार्यशाला में बच्चों ने प्रस्तुत कीं विविध रचनात्मक गतिविधियां

बचपन में मिले संस्कार बच्चों का भविष्य निर्धारित करते हैं : महेश सक्सेना
बाल रचनात्मक अभिव्यक्ति कार्यशाला में बच्चों ने प्रस्तुत कीं विविध रचनात्मक गतिविधियां
भोपाल। “बचपन में मिले संस्कार बच्चों का भविष्य निर्धारित करते हैं। आज के बच्चे सत्य जानने के लिए तर्क करते हैं।” यह विचार वरिष्ठ बाल साहित्यकार महेश सक्सेना ने लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल द्वारा संचालित नव प्रभा सेंटर के तत्वावधान में हिंदी भवन में आयोजित बाल रचनात्मक अभिव्यक्ति कार्यशाला एवं प्रस्तुति समारोह की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बाल पत्रिका संपादक इंदिरा त्रिवेदी ने कहा कि आज के बच्चे कल का भविष्य हैं। उन्हें मोबाइल के मोह से मुक्त करने के लिए अच्छी बाल पत्रिकाओं और पुस्तकों के अध्ययन के प्रति प्रेरित करना आवश्यक है।

कार्यशाला में बच्चों ने लघु नाटिका, गीत, नृत्य, पत्र लेखन तथा तत्काल कागज से कलात्मक कृतियां तैयार कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया और उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। नव प्रभा सेंटर की ओर से डॉ. वंदना सिंह ने बच्चों के साथ ज्ञानवर्धक एवं जिज्ञासा से भरी महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।

कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन समिति के सचिव घनश्याम मैथिल 'अमृत' ने दिया तथा संचालन सेफालिका श्रीवास्तव ने किया। विशिष्ट अतिथि वक्ता विनोद जैन एवं डॉ. मालती बसंत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर बच्चों को कॉपी-पेन सहित आवश्यक शिक्षण सामग्री भेंट की गई तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

आयोजन में सुनीता प्रकाश, निरूपमा खरे, सौरभ प्रकाश, नीना सिंह सोलंकी, डॉ. गिरजेश सक्सेना सहित लगभग पचास बच्चे एवं साहित्यकार उपस्थित थे। अंत में लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल की निदेशक कांता रॉय ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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