राजभाषा हिंदी हमारे लिए सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि आत्मीयता, संवेदना और संस्कृति का दर्पण है - प्रफुल्ल वी. कोहाड़े
भोपाल। “राजभाषा हिंदी का प्रयोग किसी औपचारिक पखवाड़े तक सीमित न रहकर हमारे दैनिक सरकारी कामकाज एवं जीवन की शैली बने। हिंदी हमारे लिए आत्मीयता, संवेदना और संस्कृति का दर्पण है। हम आज संकल्प लें तो हिंदी के प्रगामी प्रयोग से इसे अपने-अपने घर, परिवार, प्रदेश और देश की नहीं, विश्व की अग्रणी भाषा बना सकते हैं।” यह उद्गार प्रफुल्ल वी. कोहाड़े, मुख्य कारखाना प्रबंधक, सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना, पश्चिम मध्य रेल, भोपाल के हैं। वे राजभाषा अनुभाग द्वारा आयोजित राजभाषा पखवाड़ा-2026 के समापन अवसर पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम में राजभाषा पखवाड़े में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और हिंदी में श्रेष्ठ कार्य करने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र एवं नगद धनराशि देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्री अश्विनी वैष्णव, रेलमंत्री, भारत सरकार के राजभाषा संदेश का वाचन पी. एस. रघुवंशी, उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर ने किया। कारखाने की राजभाषा पत्रिका के नवीन प्रकाशित अंक ‘राजभाषा विशेषांक’ का अतिथियों ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर कारखाने की सांस्कृतिक अकादमी द्वारा ‘मन की भाषा’ नाटक का मंचन किया गया तथा युवा कवि सुखेन्द्र साहू ने हिंदी गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में हिंदी हस्ताक्षर अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन युवा कवि कुमार अखिलेश एवं जयश्री ठाकुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में संदीप शर्मा, सहायक कार्मिक अधिकारी एवं संपर्क राजभाषा अधिकारी ने कार्यक्रम के संयोजक-आयोजक राकेश कुमार मालवीय, वरिष्ठ अनुवादक सहित कार्यक्रम से जुड़े सभी हिंदी प्रेमियों को बधाई देते हुए सभी का आभार प्रकट किया। इस आयोजन में कारखाने के बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।


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