म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम का तृतीय अधिवेशन हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम का तृतीय अधिवेशन हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न
पावन जैन तीर्थ पालीताणा में तृतीय अधिवेशन में रचा इतिहास

पालीताणा। अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम का तृतीय अधिवेशन पालीताणा में हर्षोल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। किसी भी संस्था के राष्ट्रीय आयोजन की सफलता में आयोजनकर्ताओं और सम्मिलित सदस्यों का समर्पण अहम भूमिका निभाता है। यदि एक पक्ष पंछी है तो दूसरा पक्ष पंख है। समन्वय का यही गणित संस्था को अविश्वसनीय उड़ान देता है। अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम का पालीताणा अधिवेशन इस बात का जीता-जागता उदाहरण रहा। संस्था की अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित मरड़िया, राष्ट्रीय महामंत्री श्री मनोज जैन ‘मनोकामना’, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. प्रकाश दक के दिशा-निर्देश तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश जैन, शकुन डागा और राष्ट्रीय सह-मंत्री संगीता बाफना ‘संगी’ के कुशल प्रबंधन में आयोजित इस अधिवेशन में सम्मिलित सदस्यों का उत्साह अवर्णनीय रहा।


प्रथम दिन गुरु दर्शन के पश्चात शाम को ढोल-बाजे के साथ नाचते-गाते दादा आदिनाथ के दर्शन-वंदन हेतु वल्लभ बिहार धाम से तलेटी तक संघ के रूप में संघपति डॉ. शांतिलाल जी कोचर, सह परिवार, निवासी हिंगणघाट के साथ संघ यात्रा का आयोजन किया गया। संघ ने तलेटीजी पर आरती का लाभ लिया एवं भक्ति का आनंद प्राप्त किया। अधिवेशन के द्वितीय दिवस, 26 सितम्बर 2026 को सभी सदस्यगण पूज्य आचार्य जिनेंद्र प्रभु सूरीश्वर जी महाराज साहब, मुनि जीत चंद्र विजय जी महाराज साहब एवं मुनि ऊंकार विजय जी महाराज साहब को ससम्मान ढोल-बाजे के साथ वरघोड़े के रूप में अधिवेशन समारोह स्थल पर गहुली कर पदार्पण कराते हुए आयोजन का आगाज किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जितेश भाई शाह, अहमदाबाद एवं संगम के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन किया। पूज्य आचार्य भगवंत ने मंगलाचरण कर अधिवेशन का शुभारंभ किया। नवकार गान नीतू बाफना, मधु जैन ‘मधुलिका’ एवं पद्मा जागरूक ने प्रस्तुत किया तथा संगम का राष्ट्रीय गान कुलदीप प्रियदर्शी ने प्रस्तुत किया।


अतिथि सम्मान के पश्चात संस्था की बहुप्रतीक्षित स्मारिका एवं काव्य संग्रह ‘संगम सितारे 2026’ का विमोचन पूज्य मुनि भगवंतों, अतिथिगण एवं संस्था पदाधिकारियों के कर-कमलों से हुआ। स्वागत भाषण एवं संस्था परिचय संगम अध्यक्ष अमित मरड़िया ने दिया, जबकि संस्था की गतिविधियों एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी राष्ट्रीय महामंत्री मनोज जैन ‘मनोकामना’ ने प्रस्तुत की। अधिवेशन सभा को आचार्य भगवंत एवं मुनि भगवंतों ने अपने सारगर्भित प्रवचनों के माध्यम से संबोधित करते हुए संस्था के लिए आशीर्वाद एवं मंगलकामनाएं प्रदान कीं। इस अवसर पर डॉ. शांतिलाल जी कोचर को ‘संघवी’ पद से अलंकृत किया गया। जय वोरा, मुंबई को ‘शासन रत्न’, केतन संघवी, राजकोट को ‘जीवदया रत्न’ तथा मुकेश नाहर, जोधपुर को ‘जिनवाणी रत्न’ से अलंकृत किया गया। संस्था के आगामी अधिवेशनों का लाभ लेने वाले श्री जितेश भाई शाह (2027) एवं ख्याली लाल जी सोनीगढ़ा (2028) का गुरु आशीर्वाद से एवं संस्था पदाधिकारियों द्वारा बहुमान किया गया।


द्वितीय सत्र दोपहर के बाद आयोजित हुआ। इसमें ‘संगम सितारे’ के रचनाकारों का ‘संगम सितारे’ अलंकरण के साथ बहुमान किया गया। संस्था की वार्षिक गतिविधि के अंतर्गत नित्य लेखन के लिए नैनमल जी जैन, चेन्नई, राजेंद्र जी गुलेच्छा, बेंगलुरु एवं कमलेश नाहटा, जबलपुर को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का व्यवस्थित संचालन नेहा नाहटा 'निश्छल' और नीतू बाफना ने किया था। आभार संस्था महामंत्री ने व्यक्त किया। इसके बाद सहभागी साहित्यकारों का कवि सम्मेलन रात्रि 8 बजे प्रारंभ हुआ। मंच से काव्य के विभिन्न रसों की सावनी बौछार रात्रि के 2 बजते-बजते मूसलाधार बारिश बनकर बरसी। इस सत्र का संचालन जयंतीलाल ‘जागरूक’, चेन्नई, लोकेश ‘सरगम’, नागदा एवं चिराग जैन ‘चैतन्य’, नीमच ने निराले अंदाज में किया और सदन को ठहाके लगाने तथा वाह-वाह करने के लिए मजबूर कर दिया।


अधिवेशन के तृतीय दिवस, 27 सितम्बर 2026, रविवार को प्रथम सत्र में संगम के इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण आया, जब परम पूज्य श्री भव्य रत्न विजय मुनि जी का आयोजन स्थल पर पदार्पण हुआ। मुनि श्री के आगमन पर संस्था द्वारा गहुली की गई। पाट पर सुंदर गहुली बनाने का लाभ श्रीमती मुकेश नाहर, जोधपुर ने लिया। पूज्य गुरुदेव के पाट पर विराजमान होने के पश्चात गुरु वंदना गीत मधुर कंठ से मनोज जैन ‘मनोकामना’ ने गाया। मुनि श्री ने अमृतमयी वाणी से प्रवचन देते हुए सभा में उपस्थित प्रत्येक सदस्य के प्रश्नों का उत्तर देकर समाधान किया। गुरुदेव श्री ने भौतिकतावाद से आध्यात्मवाद की ओर अपनी जीवन यात्रा के वृत्तांत से श्रोताओं पर अमिट छाप छोड़ी। द्वितीय सत्र में ललिता जोगड़, मुंबई, मनीषा मरड़िया, चेन्नई, सीमा जैन ‘मनोकामना’, झाबुआ एवं संगीता बाफना ‘संगी’, मुंबई के मुख्य आतिथ्य में महिला रचनाकारों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर आयोजन में चार चांद लगा दिए। श्री राजेश डागा एवं श्रीमती शकुन डागा ने अपने युगल नृत्य से सदन को हास्य से ओतप्रोत कर दिया। इस सत्र का संचालन शकुंतला सरूपरिया, उदयपुर ने शायराना अंदाज में किया।


सायंकालीन सत्र शत्रुंजय नदी आरती एवं मंदिर दर्शन से प्रारंभ हुआ। रात्रि 8 बजे से पुनः काव्य की रसधार रात्रि 2 बजे तक निर्बाध बहती रही। अध्यक्षीय समापन उद्बोधन में 2027 के अधिवेशन के अहमदाबाद में आयोजन की घोषणा की गई, जिसका उपस्थित सभी सदस्यों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। अधिवेशन समापन पर संस्था महामंत्री ने महाभारत का प्रदर्शन किया। संगम परिवार की भीगी आंखें आत्मीयता के चरम बिंदु को व्यक्त कर रही थीं। अगले वर्ष पुनः मिलने के शुभ भावों के साथ सभी सदस्य अपने-अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर गए। संगम अधिवेशन 2026 में पधारे समस्त सदस्यों एवं पदाधिकारियों का हृदय तल से आभार व्यक्त किया गया, जिन्होंने इस आयोजन की व्यवस्था का कार्य सौंपकर विश्वास व्यक्त किया।

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