अच्छी कहानियाँ अंतरमन के भावों को पकड़ती हैं और बाह्यजगत तक जाती हैं - संतोष चौबे
भोपाल। मध्यप्रदेश लेखक संघ की प्रादेशिक कहानी/लघुकथा गोष्ठी शनिवार को दुष्यंत संग्रहालय, शिवाजी नगर, भोपाल में वरिष्ठ रचनाकारों की उपस्थिति में संपन्न हुई। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद, कुलाधिपति रविंद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी श्री संतोष चौबे ने अपनी चर्चित कहानी “हल्के रंग की कमीज” सुनाई और कहानी विधा के बारे में बोलते हुए कहा, “अच्छी कहानियाँ अंतरमन के भावों को पकड़ती हैं और बाह्यजगत तक जाती हैं।”
विशिष्ट अतिथि एवं मध्यप्रदेश लेखक संघ के संरक्षक डॉ. राम वल्लभ आचार्य ने लघुकथा “इतनी जल्दी क्या है” और कहानी “अहसास” सुनाई। मध्यप्रदेश लेखक संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र गट्टानी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पचपन वर्ष पुरानी संस्था मध्यप्रदेश लेखक संघ शुरू से ही साहित्य की सभी विधाओं पर गोष्ठी आयोजित करती आई है और आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा।
पूजा कृष्णा की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। अन्य आमंत्रित साहित्यकारों में वरिष्ठ कहानीकार डॉ. लता अग्रवाल ने मर्मस्पर्शी कहानी “आँगन का पीपल” सुनाई। संतोष परिहार की कहानी “अपराजित” बहुत सराही गई। वरिष्ठ साहित्यकार मनोरमा पंत की कहानी ने सभी को सोचने पर मजबूर किया। चरणजीत सिंह कुकरेजा ने “प्ले जोन” सहित दो लघुकथाएँ सुनाईं। आनंद कुमार तिवारी की कहानी “दाग” ने समाज की विसंगतियों पर आवाज उठाई।
जगदीश शर्मा ‘सहज’ की लघुकथाएँ “नकली नोट” और “शिकायत” सराही गईं। सुनीता यादव की लघुकथाएँ “मदद” एवं “अनुदान” बहुत सराही गईं। संत कुमार मालवीय ‘संत’ ने अपनी लघुकथाओं “ऑफिसर”, “जिंदाबाद” एवं “कूटनीति” के माध्यम से समाज पर करारा व्यंग्य किया। डॉ. रश्मि मोयदे, उज्जैन की कहानी “किस्मत” ने ध्यान आकर्षित किया। मनमोहन चौरे की लघुकथा “चालान” को सभी ने बहुत सराहा।
कार्यक्रम का सफल संचालन संघ के प्रांतीय मंत्री मनीष बादल ने किया और अपनी दो लघुकथाओं “तितली” और “जमीर” से श्रोताओं का मन जीता। संस्था के उपाध्यक्ष अनिरुद्ध सेंगर ने स्वागत वक्तव्य दिया एवं कोषाध्यक्ष सुनील चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।




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