म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

लघुकथाकार लघुकथा को बोन्साई नहीं इत्र बनाएं - डॉ.विकास दवे

लघुकथाकार लघुकथा को बोन्साई नहीं इत्र बनाएं - डॉ.विकास दवे
लघुकथा शोध केंद्र समिति का दशम स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न

भोपाल। 'लघुकथा को सायास लघुकथा न बनाएं उसे अपने स्वाभाविक रूप में सृजित होने दें लघुकथा को बोन्साई नहीं इत्र बनाएं, लघुकथा शोध केंद्र समिति ने कम समय में लंबी यात्रा तय करते हुए देश में अपनी अलग पहचान बनाई है केंद्र के सभी साथी एक टोली के रूप में मिलकर जिस तरह से कार्य करते हैं वह दूसरे लोगों के लिए अनुकरणीय है केंद्र के दसवें स्थापना दिवस पर केंद्र से जुड़े सभी मित्रों को बधाई।' यह उदगार हैं डॉ.विकास दवे निदेशक साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद भोपाल एवं मंत्री संचालक मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति हिंदी भवन के जो लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल के दशम स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हुए अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। 

कार्यक्रम के पूर्व मंचस्थ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और केंद्र की और से पुष्पहारों से अतिथियों का स्वागत किया गया। केंद्र के महासचिव घनश्याम मैथिल अमृत के संचालन में कार्यकम आरम्भ हुआ जिसमें कांता रॉय निदेशक लघुकथा कथा शोध केंद्र समिति भोपाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए केंद्र की अभी तक की यात्रा और आगामी योजनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में ब्रजेश नेमा के लघुकथा संग्रह ' इंसान ' का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए विशिष्ट अतिथि डॉ.मालती बसंत ने कहा कि मैं केंद्र की स्थापना से जुड़ी हूं इसके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूँ। एक अन्य विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार कांति शुक्ला ने केंद्र की वर्षगांठ पर बधाई देते हुए सभी पदाधिकारियों से एक जुट होकर कार्य करने की सलाह दी। 

आयोजन में उपस्थित राजेंद्र शर्मा अक्षर वरिष्ठ साहित्यकार ने कहा कि लघुकथा वर्तमान समय की लोकप्रिय विधा है और इसके उन्नयन में केंद्र के किए गए कार्य महत्वपूर्ण व उल्लेखनीय है। कार्यक्रम के अंत में केंद्र की ओर से सभी उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया। इस आयोजन में डॉ.गिरजेश सक्सेना, अशोक कुमार धमनियां, विनोद कुमार जैन, मनमोहन चौरे, मधुलिका सक्सेना, शेफालिका श्रीवास्तव, वंदना जोशी, सरिता बघेला, डॉ शबनम सुल्ताना सहित अनेक महत्वपूर्ण साहित्यकार उपस्थित थे।

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