रोजमर्रा के खट्टे-मीठे अनुभव ‘अचार’ की तरह परिवार की धरोहर हैं : डॉ. स्वाति तिवारी
इंदौर। बाबीसा ब्राह्मण प्रतिभा मंच द्वारा आयोजित चतुर्थ मासिक काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ. स्वाति तिवारी ने अपनी बहुचर्चित संवेदनशील कहानी ‘अचार’ के माध्यम से संदेश दिया कि रोजमर्रा के खट्टे-मीठे अनुभव परिवार की धरोहर होते हैं। उन्होंने कहानी लेखन की बारीकियों पर भी साहित्यकारों का मार्गदर्शन किया। अध्यक्षता कर रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता विनीत जोशी ने हमारी ऐतिहासिक धरोहरों से संबंधित न्यायिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए सभी साहित्यकारों को मां वाग्देवी से संबंधित अनेक जानकारियां साझा कीं। एडवोकेट दादा ओमप्रकाश जोशी ने सन 1962 में लिखी अपनी पांडुलिपि की एक संवेदनशील एवं मार्मिक कविता का वाचन कर सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर उनकी सहेजकर रखी गई पांडुलिपियों के यथाशीघ्र प्रकाशन का सामूहिक संकल्प लिया गया।
गोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह के प्रमुख एवं जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ आयुक्त रह चुके सुरेश तिवारी विशेष अतिथि, बावीसा ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट मानवेंद्र त्रिवेदी विशेष अतिथि, एडवोकेट मनोज व्यास कार्यकारिणी सदस्य एवं राजेश जोशी सचिव का सहभाग उल्लेखनीय रहा। भव्य एवं गौरवपूर्ण काव्य गोष्ठी में सर्वश्री ओमप्रकाश जोशी बब्बू, विकास जोशी वहीद, धार से पधारी श्रीमती वंदना दुबे, श्रीमती प्राची पांडे, श्रीमती पीयूषा शुक्ला, इंदौर लेखिका संघ की सचिव श्रीमती शीला बड़ोदिया, बावीसा ब्राह्मण प्रतिभा मंच के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमेश चंद्र शर्मा, डॉ. रश्मि जोशी आदि अन्य रचनाकारों ने अपनी उच्च स्तरीय साहित्यिक रचनाओं का वाचन कर सभी को मंत्रमुग्ध किया। निमाड़ी-मालवी बोली की रचनाओं ने आंचलिक परिवेश की प्रतीति कराई। मंच से प्रस्तुत साहित्य की उच्च स्तरीय रचनाओं की प्रस्तुति से अन्य साहित्यिक संस्थाओं एवं रचनाकारों को प्रेरणा लेने की आवश्यकता बताई गई। गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, शेर, दोहे, गीतिका, नई कविता, लघुकथा, कहानी आदि विविध विधाओं के बहुरंगी गुलदस्तों ने काव्य गोष्ठी में चार चांद लगा दिए।
गीता रहस्य के विद्वान श्री नितिन वैद्य ने गीता सार पर प्रेरक उद्बोधन देकर गीता को जेन जी तक पहुंचाने के अपने संकल्प को दोहराया। श्रीमती कीर्ति मुंशी एवं श्रीमती अनीता दुबे ने सुमधुर एवं सुखद गीतात्मक प्रस्तुति देकर काव्य गोष्ठी को गीत-संगीत से ओतप्रोत कर दिया। शानदार एवं आकर्षक सिलसिलेवार संचालन श्री प्रणव शुक्ला ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन श्रीमती पीयूषा शुक्ला ने किया।


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