भाव ही विचारों को समाज तक ले जाने का सेतु हैं - कुलगुरु डॉ. शिवशंकर मिश्र
भाव प्रबोध संस्था ने प्रख्यात रंगकर्मी एवं निर्देशक सतीश दवे का किया सम्मान
उज्जैन। भाव ही वह सेतु हैं, जो विचारों को समाज तक ले जाते हैं और उन्हें आचरण में परिवर्तित करते हैं। हृदय में भाव जाग्रत होने पर ही करुणा का जन्म होता है और यही करुणा सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। अपरा विद्या लोककल्याण के लिए कर्म करने की प्रेरणा देती है, जबकि परा विद्या आत्मबोध की ओर ले जाती है। इन दोनों विद्याओं का परम उद्देश्य भाव प्रबोध है। यह विचार पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. शिवशंकर मिश्र ने भाव प्रबोध संस्था द्वारा राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित प्रख्यात रंगकर्मी एवं निर्देशक श्री सतीश दवे के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार क्रिया की सिद्धि संकल्प से होती है और संकल्प दृढ़ता से सिद्ध होता है। भाव ही विचारों को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर आचरण में बदलते हैं।
सारस्वत अतिथि आचार्य प्रो. शैलेन्द्र पाराशर ने कहा कि जिस हृदय में संवेदना जीवित होती है, उसे परपीड़ा की आहट दूर से ही सुनाई दे जाती है। यही संवेदना मनुष्य को सत्-चित्-आनंद की ओर ले जाती है। भाव प्रबोध के इस युग में निरंतर सचेत, जागृत और साधनारत रहना आवश्यक है। विचार और भाव मानव जीवन के दो महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं। आज हम ऐसे निर्णायक दौर में खड़े हैं, जहां सृजन और विध्वंस दोनों की डोर हमारे ही हाथों में है। ऐसे में संवेदनशीलता और विवेक का महत्व और बढ़ जाता है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला की पूर्व अध्यक्ष आचार्य डॉ. प्रेमलता चुटैल ने कहा कि शब्द की अपनी मर्यादा और तप होता है। शब्दों में निहित भावों और उनके प्रबोध को उचित समय तथा उचित स्थान पर व्यक्त करना ही सच्चे अर्थों में जीवन है। हमारी दृष्टि सदैव आध्यात्मिक रही है, भोगवादी नहीं। मन की शक्ति को नियंत्रित करने पर भीतर असीमित ऊर्जा का स्रोत प्रस्फुटित होता है, यही ऊर्जा मनुष्य को भाव से प्रबोध की ओर ले जाती है।
समारोह में अतिथियों ने प्रख्यात रंगकर्मी एवं निर्देशक श्री सतीश दवे को शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया। अभिनंदन पत्र का वाचन भाव प्रबोध संस्था की संस्थापक डॉ. प्रीति जोशी ने किया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वागत करने वालों में प्रो. शिव चौरसिया, डॉ. देवकरण शर्मा, डॉ. उर्मि शर्मा, प्रो. उमा वाजपेयी, डॉ. सविता अरोड़ा, डॉ. रोशनी यादव, डॉ. संगीता वत्स, संदीप नागर, प्रवीण जोशी, सीमा जोशी, संगीता तल्लेरा, डॉ. श्रीकृष्ण जोशी, मुकेश जोशी, डॉ. हरीशकुमार सिंह, शशांक दुबे और संतोष सुपेकर सहित अन्य गणमान्यजन शामिल रहे। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे। संचालन डॉ. प्रीति जोशी ने किया।


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