‘सिलसिला एवं तलाश-ए-जौहर’ का आयोजन
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ के बलिदान और राष्ट्रीय चेतना पर चर्चा, शायरों ने पेश किया कलाम
छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में जिला अदब गोशा छिंदवाड़ा द्वारा शुक्रवार को हुसैन नगर स्थित शादी हॉल, पुराना बैल बाजार में ‘सिलसिला एवं तलाश-ए-जौहर’ का आयोजन किया गया। ‘तलाश-ए-जौहर’ प्रतियोगिता में दिए गए मिसरों ‘दिल का दरवाज़ा मुस्कुराया है’ और ‘किसी ने इतना तेरा इंतज़ार देखा है’ पर प्रतिभागियों ने तात्कालिक शेर कहे। अयाज़ ख़ान ने उत्कृष्ट शेर प्रस्तुत किए। उन्हें मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा प्रमाणपत्र एवं सम्मान राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। प्रतियोगिता में निर्णायक दीपशिखा सागर और अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ थीं।
शाम को आयोजित ‘सिलसिला’ कार्यक्रम में अमर क्रांतिकारी अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ के बलिदान, देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना पर चर्चा हुई। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने अपने संदेश में कहा कि उर्दू शेरो-अदब ने देशप्रेम, इंसानियत और राष्ट्रीय एकता को हमेशा मजबूती दी है। मुख्य वक्ता दीपशिखा सागर ने कहा कि अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ का जीवन साहस, देशभक्ति और सांप्रदायिक सद्भाव की प्रेरक मिसाल है। रामप्रसाद बिस्मिल के साथ उनका संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की साझा विरासत का प्रतीक है। जिला समन्वयक मुबीन ख़ान ने कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ उर्दू भाषा-साहित्य के प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण हैं।
काव्य-पाठ में दीपशिखा सागर, सैयद हामिद अली ‘हामिद’, चंदन अयोधी ‘अश्क’, अवधेश तिवारी, विजयानंद दुबे, ओमप्रकाश ‘नयन’, अजमेरा ‘मयकश’, यूनुस शेख़, अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’, अमित सोनी, स्वर्णा शेखर, शारिक़ ‘साहिल’, तरुण जैन, ओमप्रकाश ‘राकेश’, अनुराधा तिवारी और मुबीन ‘ज़ामिन’ ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। शायरों के कलाम में देशप्रेम, मानवीय संवेदना, धार्मिक सद्भाव, सामाजिक विसंगतियों, उम्मीद और जीवन के विविध रंगों की अभिव्यक्ति हुई। शारिक़ ‘साहिल’ ने कहा, ‘उन्हें कोई भी अंदाज़ा नहीं है, हमें जो इश्क़ है हिंदोस्ताँ से।’ अनुराधा तिवारी ने सुनाया, ‘धर्म, जाति, भाषा से ऊपर दिल का रिश्ता प्यारा है, तेरा रब मेरा ईश्वर है, भगवान मेरा तुम्हारा है।’ तरुण जैन ने अपनी रचना के माध्यम से समकालीन सामाजिक परिस्थितियों पर व्यंग्य किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत रचनाओं के माध्यम से साहित्य की सामाजिक भूमिका और राष्ट्रीय एकता का संदेश उभरा। अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ के बलिदान के स्मरण के साथ वक्ताओं ने साझा सांस्कृतिक विरासत, इंसानियत और सांप्रदायिक सद्भाव के मूल्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। अंत में जिला समन्वयक मुबीन ख़ान ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


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