म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

निरस्त्रीकरण का संदेश देने वाला प्रथम ग्रंथ है आचारांग : डॉ. दिलीप धींग

निरस्त्रीकरण का संदेश देने वाला प्रथम ग्रंथ है आचारांग : डॉ. दिलीप धींग
मूनक (पंजाब)। बहुश्रुत जयमुनि ने कहा कि भारत की प्रादेशिक भाषाएँ प्राकृत की उत्तरवर्ती भाषाएँ हैं। मूनक (पंजाब) में 16-18 अक्टूबर को आयोजित पंचम त्रिदिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा में बड़ी संख्या में प्राकृत के शब्द मिलते हैं। उन्होंने प्राकृत भाषा के 1570 शब्द, पंजाबी भाषा में खोजे हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पंजाब सरकार में केबिनेट मंत्री बिरेंदर गोयल ने कहा कि पंजाब के अनेक पिछड़े क्षेत्रों में जैन समाज ने चिकित्सा शिक्षा के अनेक संस्थान शुरू करके उन क्षेत्रों को पिछड़ेपन से मुक्त कर दिया दिया है। जैन समाज का यह एहसान कभी नहीं भुलाया जा सकता।

जैन संस्कार शिविर समिति, दिल्ली के सहयोग से श्रुत रत्नाकर, अहमदाबाद द्वारा आचारांग सूत्र (प्रथम श्रुतस्कन्ध) पर आयोजित संगोष्ठी में संयोजक डॉ. जितेंद्र बी. शाह ने कहा कि प्राकृत संगोष्ठी का एक उद्देश्य आगमों का समय निर्धारण, शब्द व अर्थ का संरक्षण तथा ज्ञान का संक्रमण करना है। साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने कहा कि आचारांग सूत्र निशस्त्रीकरण का संदेश देने वाला दुनिया का प्रथम ग्रंथ है। आचारांग ही विश्व का पहला ग्रंथ है, जिसमें वनस्पति आदि पाँच स्थावरकाय की सजीवता का प्रतिपादन किया गया है। डॉ. धींग ने पशु पक्षियों और वन्य जीवों के अंगों के व्यापार पर चिंता व्यक्त की और हिंसक उत्पादों का उपयोग नहीं करने की सलाह दी।

सत्र अध्यक्ष के रूप में डॉ. धींग ने कहा कि जैन धर्म ज्ञान के साथ आचरण पर भी विशेष जोर देता है, आचारांग सूत्र इसका प्रथम आधार है। श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन सभा के प्रधान जिनेन्द्र जैन, वीरभ्राता रविंद्र जैन एवं दिनेश कुमार जैन (सीएस) ने अतिथियों का सम्मान किया। संगोष्ठी में डॉ. दीनानाथ शर्मा, प्रो. विजयकुमार जैन, आयकर उपायुक्त कमल जैन, सीए विनय जैन, अभिषेक जैन, रेणु जैन, शोभना शाह, पुष्कर सोलंकी, मोहित जैन सहित अनेक विद्वानों ने भाग लिया। प्रो. एम. चंद्रशेखर ने संचालन किया।

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