म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

लघुकथा विसंगतियों पर तीखा प्रहार करती है -घनश्याम मैथिल ‘अमृत’

लघुकथा विसंगतियों पर तीखा प्रहार करती है -घनश्याम मैथिल ‘अमृत’
भोपाल। लघुकथा समाज में व्याप्त विसंगतियों को उजागर करने के साथ उन पर तीखा प्रहार भी करती है। वरिष्ठ साहित्यकार अरुण डनायक की लघुकथाओं में विषयों की विविधता और भाषा-शिल्प की प्रभावशीलता देखने को मिलती है। यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ ने लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल द्वारा आयोजित साप्ताहिक बुधवारीय ऑनलाइन लघुकथा गोष्ठी में मुख्य समीक्षक वक्ता के रूप में व्यक्त किए। गोष्ठी में अरुण डनायक ने अपनी लघुकथाओं ‘राज दरबार में पंचायत’, ‘अपना अपना यूसीसी’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘फिशिंग’ और ‘मस्जिद’ का प्रभावी वाचन किया। इन लघुकथाओं में समकालीन जेन-जी आंदोलन, शासन की कथनी-करनी के अंतर, सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार से उत्पन्न समस्याओं तथा बढ़ते साइबर अपराध जैसे विषयों को रेखांकित किया गया। प्रारंभ में मुजफ्फर इकबाल सिद्दीकी ने स्वागत उद्बोधन दिया। डॉ. ममता माली के संचालन में आयोजित गोष्ठी में लघुकथा शोध केंद्र समिति की निदेशक कांता रॉय, अवधेश तिवारी, डॉ. दिलीप बच्चानी, नितिन उपाध्याय सहित अनेक साहित्यकारों ने लघुकथाओं पर सार्थक टिप्पणियाँ कीं। अंत में अरुण डनायक ने आभार व्यक्त किया। आयोजन में देश-विदेश के अनेक लघुकथाकार एवं पाठक ऑनलाइन उपस्थित रहे।

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