आयु के साथ अनुभव समृद्ध वरिष्ठजनों से युवा पीढ़ी सीखे - डॉ. विकास दवे
भोपाल। ‘आयु के साथ अनुभव समृद्ध वरिष्ठजनों को हम बोझ न समझें। हमें, खासकर युवा पीढ़ी को, उनके अनुभवों का लाभ लेना चाहिए।’ यह उद्गार डॉ. विकास दवे, निदेशक, साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, भोपाल के हैं। वे वरिष्ठ छायाकार एवं प्रयोगधर्मी छायाकार जगदीश कौशल के दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय सभागार में आयोजित 93वें शतायु कामना वर्ष के आयोजन में मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
कार्यक्रम में अशोक मनवानी, जनसंपर्क अधिकारी ने बोलते हुए कौशल जी के साथ बिताए पलों और उनके मार्गदर्शन को याद किया। अगले वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वीणा सिन्हा ने कौशल जी लिखित ‘धरोहर’ पुस्तक पर चर्चा करते हुए इसे अपने समय का दस्तावेज बताया। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुधीर सक्सेना ने कौशल जी के छाया कौशल को आने वाली पीढ़ी के लिए अनमोल उपहार बताते हुए उनके दीर्घायु होने की कामना की। वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने कौशल जी के संस्मरण और चित्रों की पुस्तक के प्रकाशन का अनुरोध किया।
वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम सक्सेना ने कौशल जी के साथ बिताए पलों का स्मरण करते हुए उन्हें जिंदादिल और सकारात्मक ऊर्जा से भरा व्यक्तित्व बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर, निदेशक, सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय ने कौशल जी के जीवन को अनुभवों की पाठशाला बताया तथा उनसे खुशहाल और सफल जीवन सीखने की सलाह दी।
कार्यक्रम में मंचस्थ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के बाद अतिथियों का पुष्पहारों से स्वागत किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ के संचालन में कार्यक्रम आरंभ हुआ। कार्यक्रम के अंत में राजीव कौशल ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर नगर के अनेक साहित्यकार एवं पत्रकार उपस्थित थे।


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