म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

हिन्दी में सभी भाषाओं में एकसूत्रता लाने का गुण निहित है –डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिन्दी में सभी भाषाओं में एकसूत्रता लाने का गुण निहित है – डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा
भोपाल। “हिन्दी के विकास में हिंदीतर क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधीजी, आदि शंकराचार्य जी, संत ज्ञानेश्वर आदि महती विद्वानों ने हिन्दी को विश्व पटल पर गौरव और सम्मानित स्थान दिलाया है। वेद, वेदान्त के ज्ञाता अनेकों आचार्यों ने भी पूरे देश में प्रचार प्रसार के लिए हिन्दी को अपनाया। दक्षिण से उत्तर और उत्तर से दक्षिण की दिशा में अध्यात्म के प्रचार प्रसार में हिन्दी भाषा की विशिष्ट भूमिका रही या यों कहें कि हिन्दी ने संपर्क भाषा और व्यावहारिक भाषा के रूप में सेतु का कार्य किया।” यह उद्गार है डॉ. प्रभुदयाल मिश्र जी , निदेशक, महर्षि अगस्त्य वैदिक संस्थानम, भोपाल, म. प. के जो लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल द्वारा आयोजित राजभाषा पखवाड़े के ‘निज भाषा उन्नति अहै’ के चौदहवें सत्र के ऑनलाइन गूगल मीट आयोजन के मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में ‘हिंदीतर भाषा के क्षेत्रों में हिन्दी भाषा के विकास में योगदान’ विषय पर व्यक्त किए।

आयोजन में स्वागत उद्बोधन अंजू खरबन्दा दिल्ली ने दिया और संचालन डॉ. ममता माली मुंबई एवं चित्रा राघव राणा यूएसए ने किया। इस आयोजन में ‘वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा में हिन्दी की भूमिका’ विषय पर अपने विचार एवं अनुभव को व्यक्त करते हुए दूसरे अतिथि वक्ता डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, कुलानुशासक, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, म. प., ने कहा कि हिन्दी दिवस पखवाड़ा कार्यक्रम भी हमारे राष्ट्र के स्वतन्त्रता दिवस एवं गणतन्त्र दिवस के समान ही राष्ट्रीय पर्व है। हिन्दी वास्तव में वसुधैव कुटुम्बकम की हमराह है। हिन्दी ही समावेशी और उदार दृष्टि की परिचायक है।

कार्यक्रम के अंत में केंद्र की ओर से सरिता बघेला ने सभी का आभार प्रकट किया। आयोजन में उपस्थित सभी लोगों ने रुचिपूर्वक सक्रिय भागीदारी की एवं ज्ञानवर्धक जानकारियों से स्वयं को समृद्ध एवं लाभान्वित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में देश और दुनिया के हिन्दी प्रेमी उपस्थित थे।

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