भाषा का संबंध बोलने से है और लिपि भाषा की आत्मा है :डॉ. सुधीर शर्मा
भोपाल। “भाषा का संबंध बोलने से है और लिपि भाषा की आत्मा है। लिपि के माध्यम से भाषा का विकास होता है। भाषा के संरक्षण के लिए लिपि का संरक्षण जरूरी है।” यह उद्गार वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद्, भोपाल, डॉ. सुधीर शर्मा ने व्यक्त किए। वे लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल द्वारा आयोजित राजभाषा पखवाड़े के अंतर्गत ‘निज भाषा उन्नति अहै’ के पंद्रहवें सत्र में ‘हिंदी लिपि का विकास’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार एवं कार्यकारिणी सदस्य मधुलिका सक्सेना के स्वागत उद्बोधन से हुआ। कार्यक्रम में दूसरी वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पदमा शर्मा, ग्वालियर ने ‘हिंदी के साहित्यिक आयोजन और भाषा का विकास’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “हिंदी के विकास में साहित्यिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन आयोजनों के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक चेतना का प्रवाह, संवाद का माध्यम तथा वर्तनी की शुद्धता आदि विषयों पर महत्वपूर्ण कार्य होता है।” कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन डॉ. ममता माली, मुंबई एवं चित्रा राघव राणा, यूएसए ने किया। आयोजन में लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल की निदेशक कांता रॉय ने भी अपने विचार रखे। अंत में आभार प्रदर्शन कर्नल डॉ. गिरजेश सक्सेना ने किया।आयोजन में देश-दुनिया से अनेक राजभाषा प्रेमी उपस्थित रहे।


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