सच्चा साहित्य ज्ञान राशि का संचित कोष होता है : डॉ. देवकरण शर्मा
साहित्यिक संस्था भाव प्रबोध ने किया साहित्यकारों सम्मानित
उज्जैन। कालजयी साहित्य की रचना तपस्वी साहित्यकार करते हैं। उनका साहित्य ‘सत्यम्, शिवम्, सुंदरम्’ पर आधारित होता है। आने वाली पीढ़ियों के लिए साहित्य ज्ञान राशि का संचित कोष होता है। यह विचार आध्यात्मिक मनीषी एवं चिंतक डॉ. देवकरण शर्मा ने साहित्यिक संस्था ‘भाव प्रबोध’ द्वारा आयोजित सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम में नई कविता के सशक्त हस्ताक्षर प्रमोद त्रिवेदी, मालवी कवि डॉ. शिव चौरसिया तथा प्रसिद्ध आशुकवि सूरज नागर को सम्मानित किया गया। साथ ही डॉ. आर.पी. तिवारी का भी सम्मान किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृत के प्रख्यात विद्वान प्रो. बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि भरतमुनि ने ‘नाट्यशास्त्र’ में कहा है कि भाव के बिना रस की सत्ता नहीं रहती और रस के बिना भाव की सत्ता नहीं रहती। साहित्य में भाव और रस की एकात्मकता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘प्रबोध’ भी गूढ़ अर्थ वाला शब्द है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि साहित्यकार की वाणी और लेखनी से किसी को दुख नहीं पहुंचना चाहिए। कृतज्ञता मनुष्य का श्रेष्ठ धर्म है। डॉ. प्रमोद त्रिवेदी ने कहा कि समय बहुत तेजी से बदल रहा है। पाठ्यक्रम में तुलसी और रहीम अब दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने उज्जैन के पुराने साहित्यिक परिवेश को याद करते हुए कहा कि भावसार बा की दुकान पर प्रतिदिन शाम को साहित्यकारों की महफिल जमती थी, लेकिन अब ऐसे दृश्य लुप्त होते जा रहे हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में ‘भाव प्रबोध’ की संयोजक डॉ. प्रीति जोशी ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि साहित्यकार के शब्दों में शक्ति होती है। समाज को दिशा-निर्देश देने का कार्य साहित्यकार करते हैं। तीन साहित्यकारों का सम्मान करते हुए संस्था स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. उमा वाजपेयी ने किया। सम्मान पत्र वाचन डॉ. सविता अरोरा ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. प्रेमलता चुटेल, डॉ. उर्मि शर्मा, डॉ. नीलिमा वर्मा, डॉ. श्रीकृष्ण जोशी, डॉ. मुकेश जोशी, डॉ. जफर महमूद, डॉ. सविता अरोरा, डॉ. रौशनी यादव, डॉ. प्रवीण जोशी, शशांक दुबे एवं संतोष सुपेकर आदि ने किया। इस अवसर पर उपस्थित कवि बी.एस. गहलोत ‘साकित’, सुश्री संगीता तल्लेरा, डॉ. रफीक नागौरी, दिलीप जैन, प्रफुल्ल शुक्ला, अखिलेश चौरे, अशोक रक्ताले, विनोद काबरा आदि ने काव्य पाठ भी किया। आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे।


0 टिप्पणियाँ