मनुमुक्त 'मानव' ट्रस्ट द्वारा तीन प्रभात-फेरी संगठन सम्मानित
अध्यात्म-चेतना के जागरण का सार्थक प्रयास है प्रभात-फेरी : डॉ. रामनिवास 'मानव'
नारनौल। मनुमुक्त 'मानव' मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आज नगर के तीन प्रभात-फेरी संगठनों को सम्मानित किया गया। हूडा सैक्टर स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र 'मनुमुक्त भवन' मे आयोजित समारोह में चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास 'मानव', ट्रस्टी डॉ. कांता भारती, कनाडा निवासी प्रवासी भारतीय हरमहेंद्र यादव और पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी मुकेश कुमार ने प्रभात-फेरी संगठन, राधारानी प्रभात-फेरी संगठन और श्री राधारानी प्रभात-फेरी ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र भेंट कर 'मनुमुक्त 'मानव' स्मृति-सम्मान' से नवाजा।
इस अवसर पर डॉ. 'मानव' ने, प्रभात-फेरी को अध्यात्म-चेतना के जागरण का सार्थक प्रयास बताते हुए, स्पष्ट किया कि प्रभात-फेरी सनातन धर्म और ब्रज-संस्कृति से जुड़ी एक विशिष्ट परंपरा है, जो ब्रज-मंडल में प्राचीन काल से चली आ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभात-फेरी अहंकार को मिटाकर व्यक्ति के अंतर्मन में दास्य भाव और प्रेमा भक्ति का संचार करती है। हरमहेंद्र यादव ने बताया कि भारतीय सांस्कृतिक नवजागरण का स्पष्ट प्रभाव अब यूरोप के साथ अमेरिका और कनाडा आदि देशों में भी दिखने लगा है। वहाँ हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति से जुड़ी गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। घनश्याम गर्ग ने कहा कि नारनौल जैसे शहर में प्रभात-फेरी की शुरुआत एक सराहनीय कदम है; आमजन के साथ युवाओं का इसके प्रति आकर्षण और उत्साह विशेष उल्लेखनीय है। डॉ. कांता भारती और मुकेश कुमार ने ऐसे धार्मिक आयोजनों के महत्त्व को रेखांकित करते हुए, नैतिक पतन के समकालीन दौर में, उनकी आवश्यकता को प्रतिपादित किया। भूपेश संघी और संदीप गोयल ने, प्रभात-फेरी संबंधी अपने अनुभव साझा करते हुए, बताया कि इसमें आबाल, वृद्ध, वनिता, सभी भक्तिभाव और हर्षोल्लास से नगर की गलियों में परिक्रमा करते हैं, जिससे संगीतमय दिव्य वातावरण का निर्माण होता है।
ज्ञातव्य है कि प्रभात-फेरी संगठन द्वारा 201, राधारानी प्रभात-फेरी संगठन द्वारा 193 तथा श्री राधारानी प्रभात-फेरी ट्रस्ट द्वारा 65 प्रभात-फेरियों का सफल आयोजन अब तक शहर में किया जा चुका है। प्रो. अंजू निमहोरिया, डॉ. पुष्पलता भारद्वाज और कृष्णकुमार शर्मा, एडवोकेट इस सम्मान-कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे।


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