अनुवाद दो भाषाओं के बीच सेतु का काम करता है - सुभाष नीरव
भोपाल।'अनुवाद दो भाषाओं के बीच सेतु का काम करता है लेकिन अनुवाद की अपनी सीमाएं होती हैं ज्ञान को किसी सीमा में नहीं बाँध सकते कोई भी भाषा किसी देश की बपौती नहीं होती हम हर भाषा नहीं सीख सकते यदि हमें अपनी भाषा में दूसरी भाषा का ज्ञान अनुवाद के जरिए मिल जाए इससे बेहतर और क्या हो सकता है।' यह उदगार है वरिष्ठ कथाकार एवं अनुवादक सुभाष नीरव दिल्ली के जो लघुकथा कथा शोध केंद्र समिति भोपाल द्वारा ऑन लाइन गूगल गोष्ठी द्वारा 'निज भाषा उन्नति अहै' के अंतर्गत राजभाषा पखवाड़े के नवम सत्र में 'अनुवाद में साहित्य की मूल भावना को बनाए रखने की चुनौतियां' विषय पर बोल रहे थे। कार्यक्रम के आरम्भ में केंद्र की और से वरिष्ठ साहित्यकार मधुलिका सक्सेना "मधुआलोक" ने स्वागत उद्बोधन दिया।
कार्यक्रम की दूसरी वक्ता डॉ. विभा कुमारी साहित्यकार एवं विभागाध्यक्ष हिंदी मिथिला विश्विद्यालय राजभर ने 'ज्ञान विज्ञान के प्रसार में अनुवाद की भूमिका' पर बोलते हुए कहा कि -'अनुवाद की चुनौती को गंभीरता से लेना जरूरी है हर भाषा का अपना सौंदर्य और व्याकरण अलग होता है, भाषा का अनुवाद केवल शब्दों का अनुवाद नहीं होता, भाषा में अपने काल और परिवेश के अनुसार अर्थ में भी परिवर्तन होते हैं आज हम अनुवाद के माध्यम से पूरे विश्व के साहित्य और ज्ञान को समझ पा रहे हैं।' कार्यक्रम के अंत में कांता रॉय निदेशक लघुकथा शोध केंद्र समिति ने उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया।


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