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वीणा के दक्षिण भारत विशेषांक का लोकार्पण

वीणा के दक्षिण भारत विशेषांक का लोकार्पण
वीणा कभी भी किसी वर्ग और वाद की पत्रिका नहीं रही - प्रो. आच्छा

चेन्नई। श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, इन्दौर की मासिक मुख पत्रिका ‘वीणा’ के दक्षिण भारत विशेषांक का लोकार्पण 7 सितंबर, सोमवार को टी. नगर स्थित फ्रेम फ्लो स्टुडियो में हुआ। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा और राजस्थान पत्रिका, चेन्नई के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता लाइफसेल इंटरनेशनल के चेयरमैन अभयकुमार श्रीश्रीमाल जैन ने की। सभा के कुलसचिव डॉ. मंजूनाथ मुख्य अतिथि तथा राजस्थानश्री मोहिनी चोरड़िया एवं पत्रिका के संपादकीय प्रभारी डॉ. पीएस विजय राघवन विशिष्ट अतिथि थे।

अध्यक्षता करते हुए अभयकुमार श्रीश्रीमाल ने प्राचीन तमिल साहित्य के विकास में जैनों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. एम. करुणानिधि के उस कथन को उद्धृत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि गुणवान तमिल जैनों ने ‘तमिल माता’ को साहित्यिक कृतियों के असंख्य रत्नों से सुशोभित किया है। यदि आप जैनों की इन कृतियों को अलग कर दें तो तमिल साहित्य की दुनिया वीरान हो जाएगी।’ उन्होंने कहा, यह लोकार्पण उत्तर और दक्षिण को जोड़ने का सुन्दर साहित्यिक प्रयास है। साहित्य के माध्यम से संस्कृतियों को जोड़ा जा सकता है।


मुख्य अतिथि डॉ. मंजूनाथ ने कहा, दक्षिण भारत में हिंदी के प्रति समर्पण है। लोग यहां हिंदी से प्रेम करते हैं। इस ‘प्रेम नगरी’ में वीणा के विशेषांक का लोकार्पण प्रसन्नता की बात है। विशिष्ट अतिथि मोहिनी चोरड़िया ने वीणा को वैचारिक क्रांति की पत्रिका बताया और कहा, यह साहित्य, सुर और साधना की त्रिवेणी है। ‘वीणा’ के इस विशेषांक के अतिथि संपादक वरिष्ठ साहित्यकार बीएल आच्छा ने 99 वर्षों से निरंतर प्रकाशित हो रही वीणा के ऐतिहासिक पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, वीणा कभी भी किसी वर्ग और वाद की पत्रिका नहीं रही। आच्छा ने कहा, जो बोली छोड़ देते, वे उस प्रदेश के नहीं रहते और जो भाषा छोड़ देते हैं, वे उस देश के नहीं रहते। उन्होंने भारत के लोक जीवन की आत्मा में बैठकर जन-जन का साहित्य लिखने का की प्रेरणा दी। डॉ. पीएस विजय राघवन ने कहा, एक चित्र हजार शब्दों के बराबर बात कह सकता है। उन्होंने लोकार्पण से राजस्थान पत्रिका को जोड़ने के लिए आभार जताया और विशेषांक में रचनाओं का योगदान करने वाले दक्षिण भारत के पांचों राज्यों के लेखकों को धन्यवाद दिया।

श्री आच्छा ने कहा कि वीणा इंदौर के उस प्रांगण की पत्रिका है, जहां गांधी जी ने 1918 में चेन्नई सहित चार केंद्रों पर हिंदी प्रचार सभा की स्थापना घोषणा की थी।बाद में वे दस दिनों तक सभा में रहे।पुत्र देवदास गांधी को हिंदी संवर्ग चलाने के लिए नियुक्त किया। वीणा में प्रकाशित प्रसिद्ध लेखकों ने जीवन और जनता को केंद्रीय बनाया।वे मानते थे कि लोक जीवन की आत्मा में बैठकर ही जन जन का साहित्य लिखा जाए।वे प्रेरित करते थे कि जीवन से हार मत मानना‌

मद्रास विवि में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. चिट्टी अन्नपूर्णा, तमिलनाडु हिंदी अकादमी की अध्यक्ष अश्विन भवानी, लक्ष्मी नारायण शर्मा आदि ने भी विचार रखे। कवयित्री डॉ. मंजू रुस्तगी की सरस्वती वंदना से शुरू हुए कार्यक्रम का संयोजन कवि गोविन्द मूंदड़ा ने किया। अभुषा फाउंडेशंस के शोध-प्रमुख डॉ. दिलीप धींग ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में महानगर के अनेक रचनाकार और हिंदीप्रेमी उपस्थित थे।

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