‘रेवा की डगर’ केवल यात्रा वृत्तांत नहीं, संस्कृति संवाहक है : डॉ. शैलेंद्रकुमार शर्मा
नर्मदा पंचक्रोशी परिक्रमा पर केंद्रित पुस्तक का लोकार्पण, साहित्यकारों एवं नर्मदाभक्तों की रही उपस्थिति
उज्जैन। लेखक पं. सुरेश चौबे की पुस्तक ‘रेवा की डगर’ का लोकार्पण कालिदास संस्कृत अकादमी, उज्जैन के अभिरंग नाट्यगृह में प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा आयोजित साहित्यिक समारोह में हुआ। नर्मदा पंचक्रोशी पदयात्राओं की संस्मरण गाथा पर केंद्रित यह कृति यात्रा वृत्तांत के साथ-साथ नर्मदा के इतिहास, पुराण, संस्कृति, पुरातत्व और लोकस्मृतियों को समेटे हुए महत्वपूर्ण शोध दस्तावेज के रूप में सामने आई है।
समारोह के मुख्य अतिथि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक डॉ. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि ‘रेवा की डगर’ केवल यात्रा वृत्तांत नहीं, बल्कि संस्कृति संवाहक कृति है। इसमें इतिहास का प्रवाह, पुराणों की धारा और भारतवासियों की जातीय स्मृतियों का जीवंत झरोखा दिखाई देता है। पुस्तक नर्मदा से संबंधित पुरातात्विक प्रमाणों के साक्ष्य भी उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि नर्मदा केवल नदी नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति और मोक्षदायिनी है। नर्मदा प्रदक्षिणा का पथ सबसे बड़ा तीर्थ है और ‘रेवा की डगर’ पर चलकर ही प्रकृति एवं सृष्टि के संरक्षण का भाव मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने पुस्तक को नर्मदा परिक्रमा मार्ग का महत्वपूर्ण शोध दस्तावेज बताया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रख्यात साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि पंचक्रोशी यात्राओं का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। पं. सुरेश चौबे ने अपनी ऐसी ही करीब चालीस यात्राओं की गाथा को पुस्तक में अभिव्यक्त किया है। सारस्वत अतिथि महामंडलेश्वर श्री शैलेशानंद जी गिरी महाराज ने कहा कि यह कृति मात्र पुस्तक नहीं, बल्कि एक शोधपत्र है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय नदी, नारी और न्याय के चिंतन का है। यह विडंबना है कि हम नदियों को देवी का दर्जा देते हैं, लेकिन उन्हें स्वच्छ और पवित्र रखने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाते।
पुस्तक पर चर्चा करते हुए डॉ. प्रभाकर शर्मा ने कहा कि पं. सुरेश चौबे अपनी यात्राओं की प्रामाणिकता के साथ पुस्तक में उपस्थित हैं। उन्होंने धार्मिक यात्राओं को वैज्ञानिक दृष्टि से देखने और नदियों के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास को महत्वपूर्ण बताया।निमाड़ी साहित्यकार पं. हरीश दुबे ने कहा कि रेवा का पुण्य पथ ही पं. सुरेश चौबे के जीवन का मनोरथ बन गया है। एक के बाद एक यात्राएं कर उन्होंने नर्मदा से जुड़ी रोमांचकारी, आध्यात्मिक और अलौकिक अनुभूतियों की परतें खोली हैं। डॉ. माया बदेका ने भी अपने विचार व्यक्त किए। श्री वीरेंद्र पुरी ने नर्मदा महिमा पर कविता प्रस्तुत की। लेखकीय वक्तव्य में पं. सुरेश चौबे ने कहा कि प्रो. रवींद्र भारती की प्रेरणा और संकल्प से उन्होंने नर्मदा पंचक्रोशी यात्राएं कीं और इन यात्राओं के दौरान मां नर्मदा के अद्भुत वैभव को देखने और अनुभव करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक श्री मुकेश जोशी ने स्वागत भाषण दिया। डॉ. अनामिका सोनी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों ने मां वाग्देवी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर डॉ. रमण सोलंकी, मुकेश जोशी, सुरेश चौबे, धीरेन्द्र चौबे ‘बंटी’, अजय शर्मा, डॉ. अनुराधा शर्मा, डॉ. रश्मि मोयदे, प्रीति, राधेश्याम शर्मा, महंत विजय गिरी जी, शंकरलाल यादव, विवेक दुबे, अनिल शर्मा, बनवारीलाल शर्मा, डॉ. प्रेमनारायण शर्मा, अरविन्द चौरे, प्रेमनारायण शास्त्री सहित अन्य अतिथियों ने उपस्थित होकर स्वागत किया। विमोचन समारोह में डी.एस. नागरिया, डॉ. जफर महमूद, डॉ. शशांक दुबे, डॉ. संदीप नाडकर्णी, डॉ. नेत्रा रावणकर, उमाशंकर भट्ट, सीमा देवेंद्र, डॉ. राजेश रावल, अक्षय चवरे, सुदीप मिश्रा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं नर्मदाभक्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन व्यंग्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह ने किया तथा आभार डॉ. अनुराधा शर्मा, इंदौर ने व्यक्त किया।


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