मालवी काव्य संग्रह ओढ़नी पर चर्चा प्रसंग आयोजित
ओढ़नी नारी चेतना का प्रतीक है – डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा
उज्जैन। मालवी काव्य संग्रह ‘ओढ़नी’ केवल एक लेखिका की रचनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि मालवा के तेरह सौ वर्षों के इतिहास और समृद्ध मालवी संस्कृति को अपने भीतर समेटे हुए है। मालवी कविता में पुरुष रचनाकारों की संख्या अधिक रही है और कवयित्रियाँ अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में संगीता तल्लेरा का यह मालवी काव्य संग्रह अत्यंत महत्वपूर्ण है। ओढ़नी सतरंगी होती है और अपने भीतर गहरे प्रतीक समेटे रहती है। यह प्रेम, वसंत और नारी चेतना का प्रतीक है। लज्जा और शील का प्रतीक होने के साथ-साथ ओढ़नी स्त्री विद्रोह की आवाज भी बन सकती है।
ये विचार सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने प्रेमचंद सृजन पीठ, उज्जैन एवं हिंदी अध्ययनशाला, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मालवी कवयित्री सुश्री संगीता तल्लेरा के मालवी काव्य संग्रह ‘ओढ़नी’ के चर्चा-प्रसंग में अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त किए।
सारस्वत अतिथि डॉ. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि लेखिका ने अपने शब्दों को भावों में पिरोकर लोकभाषा में यह काव्य संग्रह अपनी बोली में प्रस्तुत किया है। अपनी भाषा और बोली में सृजन करना अपने आप में अद्भुत साहस का कार्य है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. जगदीश शर्मा ने कहा कि इस प्रतिकूल समय में, जब हम चारों ओर से निराशा से घिरे हुए हैं, कविता उम्मीद की किरण का कार्य करती है। कविता बची रहेगी तो मानवता भी बची रहेगी और ‘ओढ़नी’ काव्य संग्रह इसी दिशा में किया गया एक स्तुत्य प्रयास है।
विशिष्ट अतिथि एवं सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन कार्यपरिषद के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राजेश सिंह कुशवाह ने कहा कि ‘ओढ़नी’ काव्य संग्रह में दैनिक जीवन के विभिन्न विषयों को लेखिका ने अपनी कविताओं का विषय बनाया है। संग्रह में स्त्री मन की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती सुंदर कविताएँ हैं।
समीक्षक शशांक दुबे ने काव्य संग्रह और लेखिका के व्यक्तित्व-कृतित्व पर रोचक रेखाचित्र प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि श्री सुगनचंद जैन सहित सुश्री संध्या सोलंकी, कवि श्री नरेंद्र सिंह अकेला एवं दिनेश दिग्गज ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए लेखिका को शुभकामनाएँ दीं।
स्वागत भाषण प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक श्री मुकेश जोशी ने मालवी में दिया। लेखकीय वक्तव्य भी सुश्री संगीता तल्लेरा ने मालवी में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों ने माँ सरस्वती एवं प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर ‘ओढ़नी’ चर्चा-प्रसंग का शुभारंभ किया। डॉ. राजेश रावल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथि स्वागत अशोक तल्लेरा, संदेश तल्लेरा, राहुल मूथा, डॉ. श्रेयांस जैन, हरीश कुमार सिंह, अशोक भाटी, सुरेंद्र सर्किट एवं चंद्रशेखर वशिष्ठ आदि ने किया।
आयोजन में वरिष्ठ कवि हेमंत श्रीमाल, कैलाश तरल, संतोष सुपेकर, डॉ. संजय नागर, श्रीकृष्ण जोशी, दिलीप जैन, संदीप कुलश्रेष्ठ, विनोद काबरा, राकेश चौरडिया, योगेंद्र बैनाड़ा, राकेश खेमसरा, सुदीप जैन, प्रदीप बदनोरे, अमित जैन, डॉ. पुष्पा चौरसिया, डॉ. पंकजा सोनवलकर, मीरा जैन, अनामिका सोनी, डॉ. खुशबू बाफना, डॉ. अर्चना बाफना, भारती जैन, डॉ. नेत्रा रावणकर, प्रतिमा जोशी, प्रीति दुबे, किरण सिंह, डॉ. पांखुरी वक्त, देशना जैन, सीमा वशिष्ठ, अंजू ज्ञानी, संयोगिता जोशी, एस.एस. यादव, संदीप सृजन, हर्ष जैन, जितेंद्र अग्रवाल, दिलीप गुप्ता, आदेश जैन, जितेंद्र हरभजनका, अतुल खंडेलवाल, दीपक लाठी, शैलेंद्र बुंदेला, निमेष अग्रवाल, पुरुषोत्तम टेलर, विजय टेलर एवं निलेश लड्ढा सहित बड़ी संख्या में सुधीजन उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जैन कवि संगम की ओर से पदाधिकारियों ने सुश्री संगीता तल्लेरा को ओढ़नी एवं पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम का सरस संचालन पं. राहुल शर्मा ने किया तथा आभार अंजलि तल्लेरा ने व्यक्त किया।


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