मध्यप्रदेश लेखक संघ के काव्योत्सव में गूंजी राष्ट्रप्रेम और पावस की कविताएँ
कवयित्री मनीषा प्रधान शब्द प्रवाह सम्मान से सम्मानित
उज्जैन। नगर के समकालीन कवि उज्जयिनी की समृद्ध काव्य परंपरा तथा राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल और डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की साहित्यिक विरासत को समृद्ध करते हुए उसे आगे बढ़ा रहे हैं। कविता मन के भावों और संवेदनाओं की रक्षा करती है। क्रांतिकारियों में देशप्रेम, साहस और बलिदान की भावना जगाकर उनमें जोश भरने का काम भी कविता करती आई है।
यह विचार मध्यप्रदेश लेखक संघ, उज्जैन द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 14 अगस्त को प्रेस क्लब में आयोजित काव्योत्सव में अतिथियों ने व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. श्रीकृष्ण जोशी, अध्यक्ष प्रो. हरिमोहन बुधौलिया, सारस्वत अतिथि डॉ. शिव चौरसिया, विशेष अतिथि मुकेश जोशी, विशिष्ट अतिथि मनीषा प्रधान (रीवा) एवं वरिष्ठ कवि हेमराज राठौर रहे।
काव्योत्सव में कमलेश व्यास ‘कमल’ ने सुनाया— “जगमग करता सूर्य-सा, रत्नों में रत्नेश, अंत्योदय को साथ ले, आगे बढ़ता देश।” सुगनचंद जैन ने— “जिसने सींचा लहू से चमन साथियों, उस लहू का ऋणी है वतन साथियों।” डॉ. रमेश चांगेसिया प्रभात ने— “संकट में पड़े अगर हिन्द की आजादी तो, तिरंगे की रक्षा प्राणदान कर कीजिए।” डॉ. रफीक नागौरी ने— “दिल वही दिल है जो तस्वीर-ए-वतन बन जाए, आँख वो आँख नजर जिसको तिरंगा आए।”
संदीप सृजन ने— “आजादी के नाम पर, हैं इतने आजाद, भूल शहीदों को गए, छुट्टी रहती याद।” योगेंद्र बैनाड़ा ने— “अखिल विश्व में भारत की पहचान तिरंगा है, हर भारतवासी का स्वाभिमान तिरंगा है।” राकेश चौरड़िया ने— “राजनीति देश की कितनी गंदी हो गई, देश प्रेम की भावना जाने कहाँ खो गई।”
डॉ. अनामिका सोनी ने— “स्मृति के जब दीप जले, यादों के अक्स उभरते हैं।” डॉ. खुशबू बाफना ने राष्ट्रप्रेम की रचना प्रस्तुत की, जबकि मानसिंह ‘शरद’ ने— “जय जवान, जय किसान फिर हमारा नारा है, ये तिरंगा ये तिरंगा जान से भी प्यार है।”
डॉ. पंकजा सोनवलकर, डॉ. नेत्रा रावणकर, आशागंगा प्रमोद शिरढोणकर और डॉ. पांखुरी वक्त ने भी राष्ट्रप्रेम की कविताएं प्रस्तुत कीं। मालवी कवि डॉ. राजेश रावल ‘सुशील’ ने मालवी पावस कविता “नवरो क्यंऊ गाजे, आवे तो सिदो अईजा रे ।जो गरजे उ बरसे कोनी या केण मिटई जा रे।” का पाठ कर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। डॉ. श्रीकृष्ण गुप्ता, आर.पी. तिवारी, संतोष सुपेकर, डॉ. एस.एस. यादव ‘सुबोध’, डॉ. हरीशकुमार सिंह, मुकेश जोशी एवं मनीषा प्रधान ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर कवयित्री मनीषा प्रधान को ‘शब्द प्रवाह सम्मान’ से सम्मानित किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अतिथियों का स्वागत एस.एम. कछवाय, संतोष सुपेकर, डॉ. पांखुरी वक्त, डॉ. राजेश रावल, संदीप सृजन, राकेश चौरड़िया एवं डॉ. रमेश चांगेसिया प्रभात ने किया। संचालन डॉ. हरीशकुमार सिंह ने किया तथा आभार संयोजक संदीप सृजन ने माना।





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