महाकवि कालिदास जयंती समारोह में विद्वत् संगोष्ठी एवं सारस्वत सम्मान समारोह आयोजित
उज्जैन। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं कालिदास शोधकर्ता स्वर्गीय पंडित मोरेश्वर शास्त्री दीक्षित ने महाकवि कालिदास के जीवन एवं व्यक्तित्व पर गहन शोध कर एक नई मिसाल प्रस्तुत की। उनके प्रयासों ने कालिदास के जीवन-वृत्त से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये विचार उज्जैन उत्तर के लोकप्रिय विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में त्रिवेणी संग्रहालय में आयोजित महाकवि कालिदास जयंती समारोह में व्यक्त किए। यह समारोह स्व. पं. मोरेश्वर शास्त्री दीक्षित द्वारा प्रारंभ की गई परंपरा के अंतर्गत आयोजित किया गया।
मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि महाकवि कालिदास जयंती 22 जून को मनाने का श्रेय स्व. पं. मोरेश्वर शास्त्री दीक्षित को जाता है। उन्होंने ही महाकवि कालिदास की जन्मतिथि का निर्धारण कर उनकी जन्मकुंडली का निर्माण किया था। प्रो. शर्मा ने कहा कि उपलब्ध शोध-साक्ष्यों के आधार पर कालिदास का निवास शिप्रा तट पर माना जाता है। उन्होंने कहा कि कालिदास के काव्य में राष्ट्र की व्यापक अवधारणा निहित है तथा उनकी रचनाएँ भारतीय संस्कृति और परंपरा का सार प्रस्तुत करती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केदारनारायण जोशी ने कहा कि उज्जैन में प्रतिवर्ष महाकवि कालिदास को समर्पित दो प्रमुख आयोजन होते हैं - एक अखिल भारतीय कालिदास समारोह और दूसरा कालिदास जयंती समारोह। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती, महाकवि कालिदास एवं स्व. पं. मोरेश्वर शास्त्री दीक्षित के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर नृत्य निर्देशिका ऋतु शर्मा शुक्ला के निर्देशन में बालिकाओं ने गणेश वंदना एवं नटराज वंदना की मनोहारी प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अतिथियों का स्वागत पं. अनूप दीक्षित, उपेन्द्र दीक्षित, अपूर्व दीक्षित, रविन्द्र दीक्षित, वीरेन्द्र त्रिवेदी, प्रथमेश दीक्षित एवं डॉ. महेश त्रिवेदी ने किया। समारोह में प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा, पार्षद प्रकाश शर्मा तथा पूर्व पार्षद पं. गिरीश शास्त्री का स्मृति-चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सारस्वत सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, संस्कृतप्रेमी, शोधार्थी एवं नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अध्यापक पं. शैलेश दुबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन अनूप दीक्षित ने व्यक्त किया।


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