पद्मभूषण पं. सूर्यनारायण व्यास की 50वीं पुण्यतिथि पर स्मरण समारोह आयोजित
राष्ट्रीय-सांस्कृतिक पुनर्जागरण में पं. सूर्यनारायण व्यास का योगदान अविस्मरणीय : प्रो. शर्मा
भूमंडल पर यदि कोई सूर्य था तो वह पंडित व्यास जी थे : प्रो. केदारनारायण जोशी
उज्जैन। पद्मभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास ने राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण में अविस्मरणीय योगदान दिया। उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य को सांस्कृतिक जागरण का माध्यम बनाकर जनचेतना को नई दिशा प्रदान की। शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के पुनरुत्थान के साथ-साथ लोकभाषा मालवी के संवर्धन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। महर्षि व्यास की पीठ को नमन करने देश-विदेश के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भारती भवन पहुंचते थे।
ये विचार सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित पद्मभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास की 50वीं पुण्यतिथि पर आयोजित पुष्पांजलि समारोह में व्यक्त किए। पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष आचार्य डॉ. केदारनारायण जोशी ने कहा कि यदि भूमंडल पर कोई ऐसा सूर्य था जिसका आलोक सर्वत्र दैदीप्यमान था, तो वह पंडित सूर्यनारायण व्यास थे। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को इतिहास में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रसिद्ध मालवी कवि प्रो. शिव चौरसिया ने अपनी काव्यात्मक श्रद्धांजलि में कहा- "दिसा-दिसा में अमरत बाँटयो, जस छायो अक्कास, उज्जैनी का झलमल सूरज, सूर्यनारायण व्यास।" उन्होंने कहा कि पंडित व्यास ने प्रमाणित किया कि सम्राट विक्रमादित्य द्वारा प्रवर्तित विक्रम संवत विश्व का सबसे प्राचीन संवत है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में पंडित जी के सुपुत्र तथा दूरदर्शन एवं आकाशवाणी, नई दिल्ली के पूर्व अपर महानिदेशक पं. राजशेखर व्यास ने आयोजन की भूमिका रखते हुए पंडित जी के बहुआयामी अवदान और आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। मुंबई से पधारे अभिनेता देवेन्द्र खंडेलवाल ने कहा कि पंडित जी को इसलिए भी स्मरण किया जाता है क्योंकि उनकी अनेक भविष्यवाणियाँ समय के साथ सत्य सिद्ध हुईं। भोपाल से आए साहित्यकार आलोक त्यागी ने कहा कि पंडित जी की स्मृति को समर्पित ऐसे आयोजन देशभर में होने चाहिए।
व्यंग्यकार डॉ. पिलकेंद्र अरोरा ने कहा कि पंडित जी साहित्य, कला और संस्कृति के मर्मज्ञ थे। मालवी साहित्यकार पूरन सहगल (मनासा) ने उन्हें जीवन की आचार-संहिता बताया। प्रसिद्ध चित्रकार डॉ. श्रीकृष्ण जोशी ने पंडित जी से जुड़े अनेक रोचक संस्मरण साझा किए। पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन सिंह चंदेल तथा डॉ. विवेक चौरसिया ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पंडित जी को पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में कालिदास अकादमी के निदेशक डॉ. गोविन्द गंधे, प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी, प्रो. अरुण वर्मा, मनीष शर्मा, कीर्ति राणा, सुनील जैन, निरुक्त भार्गव, संदीप नागर, संदीप कुलश्रेष्ठ, डॉ. हरीशकुमार सिंह, अशोक भाटी, राहुल शर्मा, अजय मेहता, डॉ. पुष्पा चौरसिया, डॉ. अनामिका शर्मा, प्रदीप व्यास, सीमा जोशी, संदीप सृजन, सौरभ अवस्थी, देशना जैन, डॉ. रफीक नागोरी, अंकित व्यास, दिनेश रावल सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अभिनेता अभिनव चतुर्वेदी एवं डॉ. पांखुरी वक्त ने किया तथा आभार प्रदर्शन शशांक दुबे ने किया।






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