लघुकथा पहले विशेषण थी अब संज्ञा बन गई है- डॉ.देवेंद्र दीपक
साहित्यकार तपस्वी बन लोक चिंता के लिए लिखें - डॉ. उमेश कुमार सिंह
अखिल भारतीय लघुकथा अधिवेशन एवं अलंकरण समारोह हिंदी भवन में संपन्न
भोपाल। ' लघुकथा पहले विशेषण थी अब संज्ञा हो गई है यानी विधा की दृष्टि से लघुकथा ने एक महत्वपूर्ण यात्रा तय की है लेखकों में आज सृजन धैर्य की कमी है जैसे डाल के प्राकृतिक रूप से पके हुए फल जो स्वाद देते हैं वह कृत्रिम से रूप से पाल के पके फल वो स्वाद नहीं दे सकते,यही स्थिति सृजन की है।' यह उद्गार हैं डॉ.देवेंद्र दीपक वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व निदेशक मध्यप्रदेश शासन के जो लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल के आठवें अखिल भारतीय लघुकथा अधिवेशन एवं अलंकरण समारोह में आयोजित कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.सूर्यकांत नागर इंदौर को लघुकथा के क्षेत्र में उनकी सृजनात्मक उपलब्धियों के अवदान स्वरूप 'माधव राव सप्रे स्मृति लघुकथा अलंकरण -2026 से शॉल, श्रीफल, सम्मान निधि एवं अभिनन्दन पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में पद्मश्री रामनारायण उपाध्याय स्मृति प्रादेशिक लघुकथा सम्मान से वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती ज्योति जैन इंदौर को एवं आचार्य जगदीश चंद्र मिश्रा आलोचना सम्मान से डॉ.अनीता राकेश पटना को साहित्यिक सांस्कृतिक पत्रकारिता सम्मान राकेश शर्मा संपादक -'वीणा' मासिक पत्रिका इंदौर को सम्मानित किया गया। इस अवसर में बोलते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ.उमेश कुमार सिंह वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व निदेशक साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद भोपाल ने कहा -'साहित्यकार तपस्वी साधक बनकर लोक चिंता के लिए लिखें और हमें समाज ने जो दिया है उसे लौटाने की चिंता करें।'
इस अवसर पर कार्यकम की विशिष्ट अतिथि डॉ नुसरत मेहदी निदेशक उर्दू अकादमी ने कहा की 'लघुकथा आकार में छोटी होने के कारण नहीं बल्कि प्रभाव में बड़ी होने के कारण पाठकों द्वारा पढ़ी जाती है।' कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉॉ ध्रुव कुमार वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार पटना ने कहा कि -'लघुकथा शोध केंद्र भोपाल के विधा के लिए किए जा रहे प्रयास प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय हैं।' श्रीमती ज्योति जैन वरिष्ठ साहित्यकार ने 'शिक्षा साहित्य और समाज के बदलते स्वरूप की लघुकथा के संदर्भ में विस्तृत व्याख्या की' सारस्वत अतिथि डॉ.मिथिलेश दीक्षित वरिष्ठ साहित्यकार लखनऊ, डॉ.राकेश शर्मा ने भी अपने विचार रखे।
आयोजन में श्रीमती मधुलिका सक्सेना ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की एवं मंच पर विराजे अतिथियों का पुष्पहार एवं शॉल उड़ाकर केंद्र की ओर से स्वागत किया गया तत्पश्चात केंद्र की निदेशक कांता रॉय ने स्वागत उद्बोधन देते हुए केंद्र की यात्रा के बारे में आधार वक्तव्य प्रस्तुत किया एवं 'एक टोकरी भर मिट्टी' लघुकथा माधवराव सप्रे वाचन श्रीमती अंजू खरबंदा दिल्ली से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ आयोजन में 'हमारी शाखाएं कल्पना तथा विस्तार' विषय पर विजय जोशी महेश्वर, राष्ट्रीय संयोजक ने अपनी बात रखी।
इस आयोजन में श्रीमती मातुश्री धनवंती देवी लघुकथा सम्मान श्रीमती सरिता बाघेला, विशिष्ट हिंदी सेवी सम्मान डॉ मिथिलेश दीक्षित लखनऊ, डॉ. उपासना सक्सेना लघुकथा प्रेरणा शोध सम्मान प्रिंस कुमार गोरखपुर, डॉ.उपासना सक्सेना दिव्यांग प्रेरणा सम्मान श्रीमती कोमल वाधवानी उज्जैन, पारस दासोत स्मृति लघुकथा कृति सम्मान श्रीमती मीरा जैन उज्जैन, विक्रम सोनी लघुकथा कृति सम्मान डॉ. हरप्रीत सिंह राणा पटियाला, संवाद भारती सम्मान वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार बरुआ एवं अभिषेक पुरोहित भोपाल को प्रदान किए गए। इस अवसर पर डॉ वर्षा ढोबले भोपाल, श्रीमती वंदना गोपाल शर्मा भाटापारा छत्तीसगढ़, श्रीमती नीना मंदिलवार राँची झारखंड, श्रीमती गीता चौबे गूंज, बैंगलोर कर्नाटक, अनिल श्रीवास्तव गुरूग्राम हरियाणा, श्रीमती आरती सिंह एकता नागपुर, श्रीमती दीपा मनीष व्यास इंदौर, श्रीमती अर्चना त्यागी रुड़की उत्तराखंड, श्रीमती संध्या शुक्ला मृदुल मंडला, विजय कुमार शर्मा कोटा राजस्थान, श्रीमती मिन्नी मिश्रा पटना बिहार, डॉ.मनीष दवे इंदौर, श्रीमती नीहार गीते इंदौर, डॉ.ऋषि मोहन श्रीवास्तव ग्वालियर को प्रदान किए गए।
इसके साथ ही अतिथियों द्वारा स्मारिका,शोध वृत्त, एक प्रलेखित यात्रा, हमारी लघुकथाएं संपादक कांता रॉय, निमाड़ आँचल की लघुकथाएं विजय जोशी एवं गोविंद शर्मा, समय की पहचान -कांता रॉय, अनदेखा नहीं कुछ -मनमोहन चौरे, नदी का घर -विजय जोशी, विराज और चांद का सपना सुनीता प्रकाश, धड़कनों का शोर भारती पाराशर, मिन्नी कहानियों के युगीन संदर्भ - सुरिति रघुनन्दन, आमक टू कतरा - मिन्नी मिश्रा, दुर्बा- शालिनी बड़ोले, समकालीन लघुकथा में दिव्यांग विमर्श - बबीता गुप्ता का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का संचालन घनश्याम मैथिल अमृत ने किया,इसके पश्चात कार्यक्रम के तृतीय सत्र में 'शोध के विविध आयाम' विषय पर एक संगोष्ठी श्री इकबाल मसूद वरिष्ठ साहित्यकार की अध्यक्षता में हुई जिसमें श्रीमती संतोष श्रीवास्तव, डॉ. अनीता राकेश, श्रीमती अंतरा करबडे, श्रीमती कांति शुक्ला ने अपनी बात रखी, आयोजन का चतुर्थ सत्र - सृजन और समीक्षा 'डॉ. मोहम्मद आजम वरिष्ठ साहित्यकार की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि डॉ. योगेंद्रनाथ शुक्ला, विशिष्ट अतिथि डॉ.अलका अग्रवाल, डॉ. सुशीला टाकभोरे, डॉ. मालती बसंत, डॉ. क्षमा पांडेय,एवं सेवा सदन प्रसाद ने अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए एवं उपस्थित लघुकथाकारों ने अपनी लघुकथाओं का वाचन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ.ममता माली ने किया तथा अंत में डॉ.वर्षा ढोबले ने आभार प्रकट किया ,इस आयोजन में देशभर के डेढ़ सौ लघुकथा लेखक उपस्थित थे।





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