डॉ. देवेंद्र दीपक पर केंद्रित अभिनंदन ग्रन्थ शब्द शब्द उन्मेष एवं सुषेण पर्व दृष्टि और मूल्यांकन का भी विमोचन
भोपाल । निराला सृजन पीठ, साहित्य अकादमी, संस्कृति परिषद, मध्य प्रदेश द्वारा, गौरांजनी सभागार, रवींद्र भवन, भोपाल में आज व्याख्यान, रचना विमर्श एवं पुस्तक लोकार्पण का कार्यक्रम बड़ी धूमधाम से संपन्न किया गया। जिसमें "राष्ट्रीय अस्मिता के स्वर : डॉ देवेंद्र दीपक" विषय पर देश के विभिन्न भागों से पधारे विद्वान अतिथियों ने विचार विमर्श किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व संचालक जनसंपर्क श्री लाजपत आहूजा ने की। मुख्य अतिथि अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय भोपाल के कुलगुरु प्रो. देवानंद हिंडोलिया, सारस्वत अतिथि डॉ. विकास दवे निदेशक मध्यप्रदेश साहित्य परिषद रहे। प्रमुख वक्तागणों में पटना से पधारे प्रो. अरुण भगत, मुंबई से पधारे प्रो. मृगेंद्र राय, काशी से पधारे डॉ. अशोक कुमार ज्योति, और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के पूर्व कुलाधिपति डॉ. प्रकाश बरतूनिया रहे। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. देवेंद्र दीपक पर केंद्रित अभिनंदन ग्रन्थ "शब्द शब्द उन्मेष" एवं "सुषेण पर्व दृष्टि और मूल्यांकन" का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ साधना बलवटे के स्वागत भाषण से हुआ।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री आहूजा जी ने कहा कि डॉ दीपक के कुछ अवसरों का मैं साक्षी रहा हूं। डॉ दीपक ने युवाओं के बीच अपनी "देह दान" का संकल्प व्यक्त किया, ताकि समाज तक सकारात्मक संदेश जाए।
मुख्य अतिथि प्रो. देवानंद हिंडोलिया ने कहा कि। डॉ देवेंद्र दीपक जैसे व्यक्तित्व का मार्गदर्शन समाज को आगे ले जाने वाला है। सारस्वत अतिथि डॉ. विकास दवे ने कहा कि जब आदि ऋषियों के बारे में पढ़ते हैं तब सोचने में आता है कि वे कैसे होते होंगे पर जब डॉ दीपक को देखते हैं तब लगता है कि वे डॉ दीपक की तरह ही होते हैं। डॉ दीपक एकात्म मानव दर्शन के मनीषी हैं। वे अंत्यज के लिए लड़ने वाले न्यायाधीश हैं। प्रमुख वक्ता प्रो. अरुण भगत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ देवेंद्र दीपक की कविताओं में पूरी बीसवीं सदी बोलती है। डॉ दीपक का साहित्य अनेक उपयोगी सूक्तियों से भरा पड़ा है। आपातकाल के दौरान कष्ट भोगते हुए जिन लेखकों ने अपनी लेखनी की धार को बनाए रखा उनमें से डॉ देवेंद्र दीपक हैं। प्रो. मृगेंद्र राय ने अपने संबोधन में कहा कि मैं जब काव्य नाटकों पर काम कर रहा था तब मेरे हाथ डॉ देवेंद्र दीपक जी के काव्य नाटक की पुस्तक "भूगोल राजा का खगोल राजा का" हाथ लगी। मुझे यह सूचित करते हुए हर्ष है कि पूरे देश में सर्वाधिक काव्य नाटक डॉ देवेंद्र दीपक ने लिखे। "कांवर श्रवण कुमार की" मुंबई में टेक्स्ट बुक में कोर्स में पढ़ाया जा रहा है।
डॉ अशोक कुमार ज्योति ने कहा कि जीवन के झंझावातों में जब हम ऐसे व्यक्ति की उंगली थामने की तलाश में होते हैं जो झंझावातों से पार लगा दे ऐसे ही महान पुरुष डॉ देवेंद्र दीपक हैं। डॉ दीपक सदैव ज्ञान के दीपक बनकर प्रकाश बिखेरते रहते हैं। डॉ. प्रकाश बर्तूनिया ने कहा कि सामाजिक समरसता आचरण का विषय। डॉ दीपक के काव्य में, चिंतन में, सोच में और आचरण में वर्षों से सामाजिक समरसता प्रधान रही है। है। छिंदवाड़ा से पधारी डॉ टिक मणि पटवारी ने कहा कि भारतीय सनातन कथाओं में नैतिक मूल्यों को प्रचारित किया जाता है, इन्हीं मूल्यों पर आधारित "कांवड़ श्रवण कुमार की" के माध्यम से डॉ दीपक ने इन जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना की है।
इस अवसर पर डॉ. देवेंद्र दीपक का शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह द्वारा मंचासीन अतिथियों एवं सम्मान समिति के सदस्यों सर्वश्री प्रकाश बर्तुनिया, डॉ विकास दवे, डॉ साधना बलवटे अशोक निर्मल, गोकुल सोनी, , डॉ कुमकुम गुप्ता, डॉ बिनय राजाराम , राकेश सिंह, द्वारा सम्मान पत्र, शाल, श्रीफल से सम्मानित भी किया गया। सम्मान पत्र का वाचन वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने किया।
अपने सम्मान के प्रत्युत्तर में डॉ देवेंद्र दीपक ने डॉ. अरुण भगत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लेखकों को मेरी सलाह है कि वे लिखने के पहले सोचें कि वे क्या खुद रहे हैं या खाई। लेखक सूरज भले न बन सके सूरजमुखी तो बन सकते हैं। जो भारत के मूल उसकी चेतना से न जुड़ सके वह लेखक नहीं हो सकता।
नगर की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं यथा मध्य प्रदेश लेखक संघ, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, कला मंदिर, मध्य प्रदेश हिन्दी लेखिका संघ, दुष्यंत संग्रहालय, अभिनव कला परिषद, तुलसी साहित्य अकादमी, वरिष्ठ नागरिक संघ, सकलपर्णा, पटेल प्रवाह समिति, भारतीय स्टेट बैंक साहित्य एवं कला परिषद, भेल साहित्य परिषद, श्रमश्री, स्वयं सिद्धा, नागरिक कल्याण समिति, प्रखर सामाजिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, साहित्य एवं कला परिषद द्वारा डॉ. दीपक का सम्मान किया गया। साथ ही व्यक्तिगत रूप से भी अनेक साहित्यकार बंधुओं ने दीपक जी का सम्मान किया। कार्यक्रम का सरस एवं सफल संचालन श्री धर्मेंद्र सोलंकी ने किया।



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