म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

मध्यप्रदेश लेखक संघ की प्रादेशिक ग़ज़ल गोष्ठी आयोजित

मध्यप्रदेश लेखक संघ की प्रादेशिक ग़ज़ल गोष्ठी आयोजित 

भोपाल । मध्यप्रदेश लेखक संघ की प्रादेशिक ग़ज़ल गोष्ठी रविवार को दुष्यंत संग्रहालय,शिवाजी नगर,भोपाल में वरिष्ठ ग़ज़लकारों की उपस्थिति में संपन्न हुई। सर्वप्रथम डॉ. प्रार्थना पंडित ने सरस्वती वन्दना पढ़ी फिर हरदा से आये शायर जयकृष्ण चांडक 'जय' ने पढ़ा प्रश्न ये दिल से दिल का है, लेकिन हल मुश्किल का है।" रतलाम से आए शफ़ी लोदी ने सुनाया, "गुलशन में जो देखा तो बदले हुऐ मंज़र हैं, शादाब मुग़ीलां हैं,अफ़सुर्दा सनोबर हैं।" 

इंदौर से पधारी पूजा कृष्णा ने सुनाया, "तुम्हारे बिन नज़र जब आईने से हम मिलाते हैंं, अकेलापन, तड़पता दिल, सिसकती साँस पाते हैं।" भोपाल के ग़ज़लकार रमेश नन्द ने सुनाया, दास्ताँ भी सुनी नहीं जाती, पीर ऐसी कि पी नहीं जाती"। हरदा से आये मदन व्यास ने सुनाया, "महफिल में ख़ुश हो लेते हैं बाबूजी। तन्हाई में रो लेते हैं बाबूजी।" सागर से आये बिंद्रावन राय 'सरल' ने सुनाया, "शजर दिल को बनाना चाहता हूँ,, में आँधी को हराना चाह्ता हूं"। घोड़ा डोंगरी से पधारे संतोष जैन ने सुनाया, "इंतहा होने लगी है और हम ख़ामोश हैं, ज़िन्दगी खोने लगी है और हम ख़ामोश हैं"। 


मध्यप्रदेश लेखक संघ की प्रांतीय सह मंत्री डॉ प्रार्थना पंडित ने सुनाया, "ना जाने क्या क्या करते हैं जीते जाने वाले लोग, मुझको देख के हैरत में हैं आने जाने वाले लोग"। प्रांतीय सचिव मनीष बादल ने सुनाया, "वो जो सूरज चंदा का इक टुकड़ा लेकर बैठे हैं, वो ही लोभी अंधियारे का दुखड़ा लेकर बैठे हैं"। मध्यप्रदेश लेखक संघ के उपाध्यक्ष ऋषि श्रृंगारी ने सुनाया, "एक अरसे बाद टूटा चुप्पियीं का सिलसिला, बात कहनी थी मुझे, उसने कही अच्छा लगा"। सारस्वत अतिथि सुरेश पबरा आकाश ने सुनाया, "कुछ भी न किया फिर ख़ता ढूंढ रहे हैं, जो हमपे लग सके वो दफ़ा ढूंढ रहे हैं"।


मध्यप्रदेश लेखक संघ के संरक्षक और विशिष्ट अतिथि डॉ रामवल्लभ आचार्य ने सुनाया, "पास चाहे न दौलत रहे, पर दिलों में मुहब्बत रहे, घर में इज़्ज़त नहीं प्यार हो, और दुनिया में इज़्ज़त रहे।" कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ ग़ज़लकार महेश अग्रवाल ने सुनाया, "उंगलियां हाथों की हैं छोटी, बड़ी कमजोर भी, पर यही मिलकर बनाती हैं हमेशा मुट्ठियाँ।"संघ के अध्यक्ष और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजेंद्र गट्टानी ने सुनाया, "मानता हूँ मौसिक़ी का एक रुतबा है मगर, क्यूँ क़लम को साज़ का मुहताज़ होना चाहिये।" कार्यक्रम अपनी ऊँचाईयों पर पहुँचकर समाप्त हुआ. कार्यक्रम का सफल संचालन प्रांतीय मंत्री मनीष बादल, एवं प्रार्थना पंडित द्वारा किया गया और धन्यवाद ज्ञापन सुनील चतुर्वेदी ने किया।

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