मनुमुक्त 'मानव' ट्रस्ट द्वारा स्मृति-समारोह आयोजित
नारनौल। देश के स्वाधीनता-संग्राम में नामचीन नेताओं के साथ पंडित मातादीन जैसे उन लाखों कार्यकर्ताओं का भी महत्त्वपूर्ण योगदान था, जिन्होंने स्वाधीनता की मीनार का कंगूरा बनने की बजाय, नींव का पत्थर बनना स्वीकार किया। यह कहना है सुदूर पश्चिम प्रदेश, महेंद्रनगर (नेपाल) के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद राजेंद्रसिंह रावल का। मनुमुक्त 'मानव' मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थानीय सैक्टर-1, पार्ट-2 स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में, प्रजामंडल-आंदोलन के योद्धा और प्रमुख समाजसेवी पंडित मातादीन तथा उनकी धर्मपत्नी मूर्तिदेवी की स्मृति में आयोजित 28वें वार्षिक समारोह में, बतौर मुख्य अतिथि अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि पंडित मातादीन तथा उनके साथियों ने, अंग्रेजों के साथ-साथ उनके पिट्ठू राजाओं के खिलाफ भी, प्रजामंडल-आंदोलन के माध्यम से दोहरी लड़ाई लड़ी, जिसे हमेशा याद रखा जायेगा। सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी डॉ. मनोजकुमार गर्ग और भाषा आयोग नेपाल, काठमांडू के सदस्य डॉ. पुष्करराज भट्ट, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन (मध्यप्रदेश) के कुलानुशासक डॉ. शैलेंद्रकुमार शर्मा और नगर परिषद् की पूर्व चेयरमैन तथा भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष भारती सैनी ने भी, स्वतंत्रता-संग्राम और समाजसेवा के क्षेत्र में पंडित मातादीन के योगदान की चर्चा करते हुए, उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पंडित जी के सुपुत्र और चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास 'मानव' ने माता-पिता पर केंद्रित दोहे प्रस्तुत किये। उनका एक दोहा देखिये- "जीवन में जब भी मिले, खुशियांँ या अवसाद। अम्मा-बाबूजी सदा, रह-रह आये याद।।" उद्योग विकास अधिकारी डॉ. सुनील भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-गीत के उपरांत ट्रस्टी डॉ. कांता भारती के प्रेरक सानिध्य और डॉ. पंकज गौड़ के कुशल संचालन में सम्पन्न हुए इस समारोह के प्रारंभ में संयुक्त भारतीय धर्म-संसद के प्रांतीय अध्यक्ष राकेश मेहता ने पंडित मातादीन के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला, वहींओशिन शुक्ला साक्षी (नारनौल), डॉ. मुकुट अग्रवाल (रेवाड़ी), संजय पाठक (जैतपुर) और प्रवेंद्र पंडित (अलवर) ने, कविताओं के माध्यम से, पंडित जी की उपलब्धियों को रेखांकित किया।
ये हुए पुरस्कृत-सम्मानित :
समारोह में सुदूर पश्चिम प्रदेश, महेंद्रनगर (नेपाल) के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद राजेंद्रसिंह रावल (महेंद्रनगर) को अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न, सम्मान-पत्र और 11,000/- की राशि भेंट कर मातादीन-मूर्तिदेवी जीवन-साधना पुरस्कार से तथा सिरसा की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शील कौशिक और अंबाला छावनी की दिवंगत साहित्यकार तथा संपादक उर्मि कृष्ण को 5000-5000/- के मातादीन-मूर्तिदेवी स्मृति-पुरस्कार से नवाजा गया, वहीं नेपाल के डॉ. पुष्करराज भट्ट (काठमांडू) और हरीशप्रसाद जोशी (महेंद्रनगर), डॉ. शैलेंद्रकुमार शर्मा (उज्जैन) और आचार्य प्रद्युम्न (नारनौल) को मातादीन-मूर्तिदेवी शिखर-सम्मान से तथा नेपाल के त्रिविक्रम पांडे (ललितपुर), भानुभक्त आचार्य और राजेंद्र नाथ (काठमांडु, भारत के डॉ. हरेराम पाठक (डिब्रूगढ़), डॉ. प्रभु चौधरी (उज्जैन), डॉ. शहेनाज अहेमद (नांदेड़), प्रो. विजयकुमार मिर्चे (महासमुंद), डॉ. ललितकुमार सिंह (दिल्ली), प्रवेंद्र पंडित (अलवर), रामानंद शर्मा (शिमला), पंकज शर्मा (अंबाला), विजय कुमार (अंबाला छावनी), मेजर शक्तिराज कौशिक और डॉ. ज्ञानप्रकान पीयूष (सिरसा), डॉ. धर्मवीर यादव और डॉ. सुधा यादव (मीरपुर, रेवाड़ी) तथा संदीप प्रसाद, सरोज कश्यप, सुभाष कश्यप आदि (नारनौल) को, विभिन्न क्षेत्रों में उनके विशिष्ट योगदान के दृष्टिगत, मातादीन-मूर्तिदेवी स्मृति-सम्मान प्रदान किया गया।
इनकी रही उल्लेखनीय उपस्थिति :
तीन घंटों तक चले इस महत्त्वपूर्ण समारोह में सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के उपकुलपति सुनीलकुमार सोबती, कैंपस डायरेक्टर पीएस जस्सल और पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. धर्मपाल बरगढ़, हकीकत यादव दिल्ली), डॉ. भंवरसिंह कसाना (महेंद्रगढ़), पूर्व जिला बाल-कल्याण अधिकारी, महेंद्रगढ़ विपिन शर्मा, बीइओ, अटेली मुकेश कुमार, डॉ. सीएस वर्मा (मंडी अटेली), वहीं नारनौल से भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष सरला यादव, निगरानी समिति के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र गौड़, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, क्षेत्रीय भूगर्भ जल वैज्ञानिक राकेश निमहोरिया, समाजसेवी रामानंद अग्रवाल, घनश्याम गर्ग और रानी सांघवी, प्रोफेसर डॉ. वंदना कुमारी, प्रमुख पर्यावरणविद् कृष्णावतार शर्मा और कृष्णकुमार शर्मा, मुरारीलाल शर्मा, एडवोकेट, श्रद्धा शर्मा, ऋतु शर्मा, डॉ. शर्मिला यादव और केबीसी फेम सचिन अग्रवाल के साथ कई गणमान्य नेपाली नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


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