म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

बुंदेली लोक कथाओं का अनुशीलन का विमोचन

बुंदेली लोक कथाओं का अनुशीलन का विमोचन


उज्जैन। ॐ क्लीं महाकाली महाविद्या शक्तिपीठ द्वारा क्षिप्रम् होटल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. गीतांजलि मिश्रा के शोध कार्य पर आधारित कृति 'बुंदेली लोक साहित्य का अनुशीलन' (लोकपर्व, व्रत, त्यौहार, उत्सव) ग्रंथ का लोकार्पण संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं श्रीमती राजकुमारी मिश्रा जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। माँ सरस्वती वन्दना की संगीतमय प्रस्तुति वरिष्ठ कवयित्री अनामिका सोनी ने अपने सुमधुर कंठ से की। तबले पर संगत संगीतकार पंडित शैलेंद्र भट्ट एवं हारमोनियम पर पंडित अजय मेहता ने संगत दी। मंचासीन अतिथियों का सम्मान पंडित राजारामजी मिश्रा, श्रीमती मिथिलेश मिश्रा, शक्तिपीठ आचार्य हरगोविंद मिश्रा, भागवत आचार्य पंडित रितेश रावल एवं पण्डित शाश्वत मिश्रा ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉक्टर अर्पण भारद्वाज थे। अध्यक्षता हिंदी एवं मालवी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ शिव चौरसिया ने की। विशेष अतिथि मध्य प्रदेश लेखक संघ के उज्जैन इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ. हरिमोहन बुद्धोलिया, एवं हिंदी विभाग की श्रीमती डॉ. हीना तिवारी थे। पुस्तक की समीक्षा संस्कृत विदुषी एवं लेखिका डॉ .पाखुरी वक्त ने की। 

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज जी ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि लोक साहित्य, लोक कथा, लोक पर्व, लोकगीत एवं लोक संस्कृति को सहेजने की आज के समय में नितांत आवश्यकता है। बेटी डॉ. गीतांजलि मिश्रा ने अपनी इस कृति में लोक साहित्य को सहेजने का सराहनीय कार्य किया है। इसके साथ ही लोक कथाओं का अनुशीलन करके इस कृति को संग्रहणीय बना दिया है। जो आने वाले समय में शोधार्थियों का मार्ग प्रशस्त करेगी। 

इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि सतीश श्रीवास्तव 'सागर', डॉ. विक्रम परमार 'विवेक', हास्य कवि सुरेंद्र सर्किट एवं डॉ. राजेश रावल 'सुशील' ने काव्य पाठ किया। मंचासीन अतिथियों द्वारा ग्रंथ लोकार्पण के पश्चात ॐ क्लीं महाकाली महाविद्या शक्तिपीठ, उज्जैन द्वारा लेखिका डॉ गीतांजलि मिश्रा का शॉल, श्रीफल, अभिनंदन पत्र एवं पुष्प गुच्छ अर्पित कर सम्मानित किया गया। प्रस्तुत ग्रंथ पर डॉ. गीतांजलि मिश्रा ने कृति पर केंद्रित अपने अनुभव सभागार में उपस्थित विद्वान मनीषियों के समक्ष प्रस्तुत किये।

इस अवसर पर सर्वश्री वरिष्ठ रंगकर्मी शरद शर्मा, भूपेंद्र बर्बेले, अंकित तोमर, पण्डित रितेश रावल, पंडित मोहित दवे, मोनिका झरिया आदि पारिवारिक, सामाजिक, कवि, साहित्यकार एवं आध्यात्मिक संस्था से जुड़े कहीं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मालवी गीतकार डॉ. राजेश रावल ने किया एवं आभार अनुज शाश्वत मिश्रा ने माना।
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