म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी स्मरण प्रसंग में पूर्व आईजी डॉ. पन्नालाल की तीन कृतियों का हुआ लोकार्पण

आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी स्मरण प्रसंग में पूर्व आईजी डॉ. पन्नालाल की तीन कृतियों का हुआ लोकार्पण

उज्जैन। क्लैसिकी शोध संस्थान एवं मध्यप्रदेश लेखक संघ उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी स्मरण प्रसंग एवं पूर्व आई.जी. डॉ. पन्नालाल की तीन कृतियों का लोकार्पण महाश्वेतानगर में एक भव्य समारोह में हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलगुरु डॉ. मोहन गुप्त ने कहा कि जिसमें जैसी श्रद्धा होती है वह वैसा ही हो जाता है और त्रिपाठी जी ने अनौपचारिक आलोचना का सूत्रपात किया। आज उनके विचार यहीं पर स्थित होकर न रह जाए बल्कि अगली पीढ़ी को संक्रांत करके जाएँ। सारस्वत अतिथि पूर्व कुलगुरु आचार्य डॉ. बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि त्रिपाठी जी भारतीय काव्य शास्त्र के उद्भट विद्वान थे और आचार्यों की परंपरा में विलक्षण थे जो एक गहरी चिंतनधारा ,परम्परा से जुड़े थे। विशेष अतिथि सम्राट विविवि कार्यपरिषद सदस्य राजेशसिंह कुशवाह ने कहा कि उज्जैन तपस्वियों और मनीषियों की नगरी रही है तथा उन्हें याद करना हमारा कर्तव्य है। प्रमुख वक्ता कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने कहा कि त्रिपाठी जी प्राचीन शास्त्रों के पुनर्व्याख्याकार थे और वे शब्द शक्ति एवं रस विचार के अप्रितम व्याख्याकार थे। पूर्व आईजी डॉ. पन्नालाल की तीन पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए अतिथियों ने कहा कि इन पुस्तकों में डॉ. पन्नालाल के प्रशासनिक अनुभवों का निचोड़ है जिससे नए प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेरणा लेनी चाहिए। लेखक डॉ. पन्नालाल ने , त्रिपाठी जी को स्मरण करते हुए उनकी सादगी और विद्वता कीं चर्चा की।

विषय प्रवर्तन मध्यप्रदेश लेखक संघ के अध्यक्ष आचार्य प्रो. हरिमोहन बुधौलिया ने करते हुए त्रिपाठी जी से जुड़े रोचक संस्मरण प्रस्तुत किए।आचार्य प्रो. शैलेन्द्र पाराशर, तुलसी मनवानी ने भी समारोह में अपने विचार व्यक्त किये। आरम्भ में त्रिपाठी जी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया और डॉ राजेश रावल सुशील की सरस्वती वंदना से आयोजन आरम्भ हुआ। अतिथि स्वागत शाल एवं पुष्प माला से आचार्य हरिमोहन बुधौलिया द्वारा एवं मध्यप्रदेश लेखक संघ के सचिव डॉ. हरीशकुमार सिंह ,प्रफुल्ल शुक्ल आदि ने किया।

समारोह में बड़ी संख्या में सुधि साहित्यकार उपस्थित रहे जिनमें संदीप कुलश्रेष्ठ, डॉ. श्रीकृष्ण जोशी, डॉ विमल गर्ग, डॉ विभा द्विवेदी, डॉ. सुरेश यादव, पीयूष लाल, रमेशचंद चांगेसिया, संदीप सृजन, डॉ. उर्मि शर्मा, डॉ. पुष्पा चौरसिया, डॉ. क्षमा सिसोदिया, डॉ. अभिलाषा शर्मा, प्रतिभा शर्मा, हरिहर शर्मा, आर सी शर्मा, अखिलेश अखिल, विनोद काबरा, अमिताभ त्रिपाठी आदि उपस्थित थे। संचालन डॉ. पांखुरी वक्त और आभार डॉ. हरीशकुमार सिंह ने व्यक्त किया।

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