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आदिवासी प्रणय पर्व भगोरिया गीत


मनोहर सिंह चौहान 'मधुकर'

ढोल ढप की थाप नचलो भगोरिया आया रे।
हालो रे सगला हालो भगोरिया आया रे।।

ढोल की तो धूम मची है,गूंजे बंसी वारी।
झुमझुम के नाच रही है,कमली ओर कारी।।
नेन मटकाती गोर्डी ने दित्या भाया रे...

दीत्या ने जीवा लारे, नरा ही मनखु आया।
मेरा में करे कुराटा,हिलमिल के हरसाया।।
दित्यो दिखे छेल छबिलो,म मेरा घुमाया रे...

कमर बंदेली गोफन, चांदी रो हाथ कडो।
वट वाली मुछा वीरी, वू देखे दूर खडो।।
अल्गुजे की तान छेड़, पियू ने बुलाया रे....

माथे तो लटके बोर्डो,कमर जमे कंडोरो।
कान में झेला सुहावना,गला पेरियो कंठो।।
सब गांव रा पोरा पोरी, सज धज के आया रे....

हाट वाट मै नेण मिले,मिल पान खवाया रे।
रेट झूले साथ झूले, गोदना गुदाया रे।।
चूड़ी मेहंदी काजर टिकी ले भगाया रे...

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