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लाॅक डाउन : स्त्री जीवन



  *पुष्पा सिंघी


लाॅक डाउन
कहाँ नया है
स्त्री-जीवन में....
लक्ष्मणरेखा
बनी जन्म के साथ
घर -आँगन में...!!


उम्र के
किस पड़ाव में
नहीं थीं बंदिशें....
बारहमास
उमड़ती-घुमड़ती
रहीं थीं बारिशें...!!


रूढ़ियों की
मूढ़ जंज़ीरें सघन
टूटी कब भला....
सदियों से
सही अकथ यातना
दौर यही चला...!!


सुनो तुम ,
क्या होता है लाॅक डाउन
जान गये ना....
संवेदना-पुष्प
विकसे अंतस में
अब कुछ न कहना...!!


*पुष्पा सिंघी , कटक


 


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