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मेरा है अभिमान तिरंगा



















*डॉ.नीलम खरे


मेरा है अभिमान तिरंगा ।
सचमुच में सम्मान तिरंगा ।

शेष सभी बातें बेमानी,
मेरी तो है आन तिरंगा ।

सुखकर भी है,मंगलदायी,
हरदम मंगलगान तिरंगा ।

गर्व से फहराता है नित ही,
दिल में है जयगान तिरंगा ।

वतन रहे हरदम ही रक्षित,
दे दूंगी निज जान तिरंगा ।

रहे तिरा अस्तित्व सदा ही,
बस इतना अरमान तिरंगा ।

युगों-युगों हो तेरी सत्ता ,
रहे युं ही बलवान तिरंगा ।

तेरा गौरव ,तेरी महिमा,
नहीं कोय व्यवधान तिरंगा ।

आज़ादी का अफसाना तू,
पूत हुए बलिदान तिरंगा ।

तीन रंग से तू है सज्जित,
लगता है तू प्रान तिरंगा ।

'नील' फिदा है केवल तुझ पर,
माने तुझे जहांन तिरंगा ।
    
*डॉ.नीलम खरे
  मंडला(म.प्र)






 














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