Subscribe Us

सच में मेरा प्रेम यही है



*विजय कनौजिया*
रीति यही है नीति यही है
मेरी सच्ची प्रीति यही है
प्रेम से अभिसिंचित होना ही
सच में ही अनुभूति यही है..।।

मेरे मन की चाह यही है
अरमानों की राह यही है
तुम ही हो मेरे जीवन में
सच में मेरी चाह यही है..।।

तुम ही से जगमग जीवन है
तुम ही से हैं ये मुस्कानें
तुमसे ही है प्रेम विभूषित
सच मे मेरा प्रेम यही है..।।

प्रेम अलंकृत तुम से ही है
चाहत का श्रृंगार तुम्हीं से
हर अभिलाषा में तुम ही हो
सच में मन का भाव यही है..।।

रीति यही है नीति यही है
मेरी सच्ची प्रीति यही है
प्रेम से अभिसिंचित होना ही
सच में ही अनुभूति यही है..।।
सच में ही अनुभूति यही है..।।

*विजय कनौजिया,काही,अम्बेडकर नगर (उ0 प्र0)
मो0-9818884701


अब नये रूप में वेब संस्करण  शाश्वत सृजन देखे

 









शब्द प्रवाह में प्रकाशित आलेख/रचना/समाचार पर आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का स्वागत है-


अपने विचार भेजने के लिए मेल करे- shabdpravah.ujjain@gmail.com


या whatsapp करे 09406649733






















टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां