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मुश्किल(कविता)






*मोहित सोनी*


मुश्किल ये नहीं है कि 
मुश्किलें , 
सामने खड़ी है ।


मुश्किल ये है कि 
उम्मीदें ,
धराशायी पड़ी है ।


डर ये नहीं है कि 
हार से ,
सामना करना होगा ।


डर ये है कि 
खुद से ,
खुद को लड़ना होगा ।


कोशिश ये नहीं है कि
जीत से पहले
हार जाए ।


कोशिश ये है कि
हार न माने,
जब तक जीत न जाए ।


साहस ये नहीं है कि
दुनिया,
जीतकर दिखाए ।


साहस ये है कि
मन से न हारे,
मन पर विजय पाए।


इच्छा ये नहीं है कि
खुद की 
जरूरत पूरी हो जाए ।


इच्छा ये है कि
किसी तरह,
देश के काम आ जाए ।


जिंदगी ये नहीं है कि
सुख-दुःख में
कट जाए।


जिंदगी ये है कि
मौत के बाद भी
सबकी यादों में जी जाए।


*मोहित सोनी,तिलक मार्ग कुक्षी, धार , म.प्र.





 


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