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है अनोखा देश ये अपना (बाल कविता)


 

*अलका सोनी*

 

है अनोखा देश ये अपना

और अनोखे जिसके हैं त्यौहार

आपस में हैं गुंथे हुए सब

ज्यों हो कोई मुक्ताहार।

 

विविध विविध है भाषा इसकी

जाने कितनी ही है बोली,

रंग गुलाल उड़ाती है आती

यहाँ रंग - बिरंगी होली।

 

विद्या बांटती वसन्त पंचमी

मिठास घोलती है संक्रांति

अन्न- जन को मिलता सम्मान

गणेश चतुर्थी, ओणम देते शांति।

 

शक्ति का प्रतीक बन आता दशहरा,

विजय, शौर्य की करते आराधना

नारी है रूप शक्ति- त्याग की

होती पूरी उससे ही हर साधना।

 

कितनी खुशियाँ लेकर दिवाली आती,

संपन्नता, वैभव और देती है खुशहाली

द्वार -चौखटे दीप जगमगाये,

मेवे, पकवानों से सजी रहे थाली।

 

*अलका 'सोनी',C-1/4, Road No.1, Riverside Township, Burnpur - 713325, Asansol AMC, West Bengal.

Email address:- alka230414@gmail.com

 

 


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