उज्जैन शहर के साहित्यकारों ने किया मालवी बोली में काव्यपाठ और संवाद उज्जैन। मध्यप्रदेश संस्कृति संचालनालय द्वारा 14-15 सितंबर 2025 को रवींद्र भवन, भ…
भारतीय लोक और जनजातीय साहित्य एवं संस्कृति : सामाजिक परिवर्तन, विविध परम्पराएँ और शैलियाँ पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी लोक मानस की आकांक्षाओं औ…
नारायणी माया मालवेंद्र बदेका की दो काव्य कृतियां संजा बाई और म्हारी संजा में मालवी लोक गीत के साथ मांडना कला और संजा की सुंदर कलाकृति भी समाहित है।…
थाने घणा लाड़ लड़ावांगा, मन री वात वतावांगा, थे आओ संजा माता, थाने हिरदा में वसावांगा...। गोबर भी लावांगा ने, फुलड़ा भी सजावांगा, हाथी,घोड़ा वणावांगा…
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