राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में एक भव्य हिं…
कवि प्रदीप भारतीय सिने- संसार में नवजागरण के प्रतिनिधि स्वर हैं। उनके गीतों में भारत की सांस्कृतिक आत्मा का तेजस्वी स्वर है आजादी की लड़ाई के परिदृश…
पिता वो ,जो संघर्ष भरा जीवन जीता है सिर्फ इसलिये, ताकि जी जाये वो सकून से जिनका वो पिता है। पिता वो, जो काँटों भरी राह चलता है सिर्फ इसलिये, ताकि उनक…
आज नहीं तो कल फिर गुल यूं खिलेंगे दरख़्तों की कोख में सांस लेते नवजात पलेंगे कुदाली को हत्थे पर होगा अफसोस एक दिन करतूत पर खुद की फिर आंसुओं के झरने ब…
हमने कब चाहा, हमारी ख़ातिर वक़्त ही ठहर जाए कब चाहा हमनें, हमारी बात तसल्ली से सुनी जाए चौराहे पर खड़े हो ख़ुद को कई बार तन्हा महसूस किया किससे कह…
एक स्त्री के वैचारिक गर्भ में अंकुरित होता है परिवार का पहला बीज एक स्त्री अपने मन के गर्भनाल से जोड़कर चलाती है परिवार की सांसें एक स्त्री बचपन मे…
महावीर आराध्य तुम ही तुम ही जग कल्याणी हो जीवों के दुःख हरता तुम ही तुम ही सम्मति नामी हो जनम मरण दुःख दूर भगाया सत्य अहिंसा मार्ग बताया अनेकांत व्रत…
सुरभि मय स्पर्श, संयम भाव के मीत सृजन आराधन मय,नित सृजन नव गीत चित्त धर भाव प्रिय,असंख्य स्मरण प्रसंग अंतर्मन में बज रहे, जीवन अनुपम मृदंग कर्ण प्र…
वृक्ष मन का हरा करेंगें, व राम सबका भला करेंगें दया के सागर दया करेंगें, दया के सागर दया करेंगें।। कभी तो चमकेगा मन का दर्पण कभी तो होंगे हमें भी द…
नए साल का हो रहा है आगमन । बीते साल का हो रहा है गमन ॥ नई सौगात लेकर आए यह नुतन वर्ष । बच्चों से बुजुर्ग में छाए हर्ष ॥ ना हो किसी का भी संकट से सामन…
उम्र अब ढलान पर है जरा सा आवेग तो ज़ाहिर है ख़ुद को साबित करना है ये निराशा तो ज़ाहिर है माकूल हो आगे का सफ़र ये सिफ़र उम्मीद तो ज़ाहिर है ख़ुदा का …
नव वर्ष के नव उदित सूर्य की रश्मियां जब बंजर धरती पर पड़ी तो धन-धान्य से मालामाल हो गई, आँख के आँसू पर पड़ी तो रुमाल हो गई, भूख से बिलखते बच्चे…
मैं अब हँसना चाहती हूँ मैं अब उड़ना चाहती हूँ बहुत मार लिया मन को मैं अब जीना चाहती हूँ। बहुत रुलाया हैं आंखों को बहुत भूलाया है सपनों को अब अपने इस…
न दोस्तों को भूलें न दोस्तों को छोड़े अनमोल दोस्ती के रिश्ते को नहीं तोड़े। दोस्तों से मिलती है जीवन में ताज़गी ह…
अजीब सा खेल है समय का हर किसी के लिये महत्व है समय का समय कभी एक सा नहीं हुआ किसी का बदलता है यह हर किसी का धूप तो कभी छांव बनकर आता है समय पतझड़ त…
युगों - युगों से चली आ रही है जिस वसुधा की गौरवगाथा वह फिर अपनी अतीत को संजोए अपनी महान विरासत के साथ अवतारी पुरुष रामलला को कर रहे हैं दिव्य गृह मे…
आंखों की झील में मरी, सपनों की मछलियां। मायूसी में ढल गया, कितना सब्र रखता मैं। मेरा उनका संबंध, ना वो समझ सके ना मैं। प्राणों पर बन आती है, मांझी की…
विरहता की टीस से उभर जाता है प्रेम ज्वार भाटे सा चाहत ,चकोर सी आकर्षण दे जाती चंद्रमा को। आँगन में चांदनी की छाया जब बादलों की ओट से कराती पल-पल इंतज…
आओ हम मानवता लाएं आगे स्वतः बढ़ आएँ मानवता आगे बढ़ाएं, द्वंद, घृणा, बैर, क्लेश, जड़ से हटाएं मिटाए …
कारखानों का कोलाहल वाहनों का पों पों शोर, सायरन बजाती एम्बुलेंस रास्ता रोकतें पशु ढोर। भ्रमित जब करते हैं नेता दंगाई करते हो हल्ला, गली मोहल्ले हैं प…
लेखकों के विचारों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है ©️ 2020-21Shabd pravah सर्वाधिकार सुरक्षित Email- shabdpravah.ujjain@gmail.com