पहाड़ों से उतरकर - ज़मीं पर आई ठंड । सन्दूक से निकलकर - बाहर आए स्वेटर । मौजे , टोपे , मफ़लर - कांपे कम्बल थर-थर । आतंक अब ज़मीं पर - खूब मचा रही ठंड…
उच्च हिमालय बहती नदियां कल कल करती झरनों की आवाजें फैली हरियाली ,सुगंधित सुमन महके समीर,बहकी कलियाँ ऐसी गोद हिमाचल की जय जय जय हिमाचल की। ऊंचे वृक्ष,…
याद तुम्हारी मैं बन पाता तो जीवन जीवन होता। मुझे बुलाती ख़्वाबों में तुम अपना मधुर मिलन होता। रोज मुझे तुम लिखती पाती उसमें सब सपने लिखती। जितने ख्व…
प्रिय! बगिया तुम बिन सूनी है कली-कली सकुचाई हैं । मुँह ढाॅंपें बैठी है कोयल, याद तुम्हारी आई है । पायल की रुनझुन-रुनझुन आंगन ने है सुनी नहीं कल्पनाओ…
मतदान का फ़िर पर्व आया । उत्साह सबके मन में छाया । मतदान सभी को करना है । ईमानदार को चुनना है । देशहित का जो काम करे - …
आइसक्रीम - से दिन - कुल्फ़ियों - सी रातें । धूप की गर्मी - धरी की धरी रह गई । सुबह ही शाम से - उसकी पोल कह गई । जनवरी के आगे - टिक न पाईं बातें । अल…
दीप हूँ जलता रहूंगा , तिमिर से लड़ता रहूंगा।। अश्रुपूरित नयन हर तरफ , और खंडित हैं मन हर तरफ। राह अब कोई दि…
सतत है गतिशील - समय का चक्र । बहुत कठिन है - साधना का पथ । आरूढ़ होना है - समक्ष खड़ा रथ । बहाव है अनुकूल - हुआ न वक्र । भक्त हो , मिलेगी - भावना को …
जटिल हो गए जीवन के मुद्दे , सरल करेंगे उनमें से दो-चार । फेसबुक की दुनिया से निकलें , थोड़ी देर कहीं मिल बैठें यार । जितना चाहें जी भर के हँस लें , ज…
रैन अमा की खिल गई, जगमग करते द्वार। दीपमालिका सज गई, चौखट बंदनवार। जैसा धरती से लगे, तारामय आकाश। नभ से ऐसे दिख रहा, झिलमिल दीप प्रकाश। नन्हें नन्हे…
दीपक केवल शब्द नहीं है इसकी अनुपम कीमत है। है अखंड दीपक का जलना,पावनता की इज्जत है। दीपक ने मानव जीवन में उजियारे का सार लिखा। दीपक ने पर्वों की महिम…
विद्युत्दीप जलाने वालो स्नेहयुक्त दीपक भी बालो महल - झोंपड़ी गले मिलें यदि तो सच्ची दीवाली है अगरु - धूप की फुलझडियां हों मृदु मुस्कानों की लड़ियां ह…
तुम हो क्षणिक तृप्ति के चाहक , तुमने जानी केवल लघुता । मरुथल-मरुथल भटका हूँ तब , मेरी प्यास अमर हो पाई । पाया हर संवाद सुखद तो , …
आओ सृष्टि में नव ऊर्जा का फिर संचार करें। सृष्टि प्रदूषण मुक्त करें, धरती से प्यार करें। मृताशौच वैराग्य सदृश हम पर्व मनाते हैं, दिन दूने और रात च…
खिल गया गेंदा लजाई रातरानी मोगरे ने लिख दिये कुछ गंध के दिन क्या करूं कुछ भी समझ आता नहीं है आंख में उभरी नई कमजर्फ़ भाषा सुर्ख गालों पर गुलाबों की छ…
पहनकर गर्म ऊनी कपड़े - दिन जाड़े के आए । बैठ धूप में ये - बदन अपना सेंके । गप्प हांक - हांक - ये दूर की फैंके । ले - लेकर चाय की चुस्कियां - दिन …
हमने युगों-युगों से गाया मानवता का राग ।। चाहे जैसी विपदा आई , हम उससे निर्भय टकराए । हमने बंजर धरती पर भी , उम्मीदों के फूल …
तुम्हारी गली से गुज़रने का मतलब हमें फिर तुम्हारी कमी खल रही है सफ़र में, समर में, मोहब्बत के घर में तुम्हीं एक साथी थे जीवन -डगर में हो रस्ता कोई या…
अपनी जिद में दोष देना दुनिया को आसान है मतलबी दुनिया नहीं है मतलबी इंसान हैं मतलबों में मतलबी अब हो गए ईमान वाले मतलबों का मतलब तो बस जानते हैं जान व…
कोई कैसे जिए भला अब , बहने लगी हवा ज़हरीली । गुणा-भाग हैं सबके अपने , सबके अपने-अपने हित हैं । क़दम-क़दम …
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