म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत
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राम राज का आगमन (दोहे) -संदीप सृजन
राम- राम कहते रहो (दोहे) -संदीप सृजन
कुर्सी पाकर चैन (दोहा) -रमेश मनोहरा
करिये दो दो हाथ (दोहे) - हमीद कानपुरी
उस जनता की खाल (दोहे) - रमेश मनोहरा
दीपावलियाँ हैं सजी (दोहें) -डॉ मंजु गुप्ता
दीप -गाथा (दोहे) -कमल कपूर
राम नाम के तेज से (दोहे) -डॉ शरद नारायण खरे
उत्सव है सौभाग्य का (दोहे) -रमेश शर्मा
गर्म तवे पर सोच (दोहे)
देखिये मेहमान
मन अनुरागी हो गया (दोहे)
बदले खुद तकदीर (दोहे)
बेटी के हाथों सभी, हो मंगल दस्तूर
फागुन फिर से आ गया
होली रंग लपेट कर
अब मत हरगिज़ ढूढिये