राम राज की कल्पना, फिर होगी साकार। हर्षित है जन-जन यहॉ, उल्लासित संसार।। राम विराजे धाम में, उत्सव है चहुओर। भारत मॉ के भाल पर, उदित हुआ नव भोर।। पौष…
राम नहीं है कल्पना, राम जगत आलोक। राम नाम के जाप से, दूर रहे भय,शोक।। राम शब्द छोटा मगर, भरा भाव विस्तार। राम जीवन की सुचिता,राम श्रेष्ठ व्यवहार।। रा…
दौड़ रही देखो यहां, भ्रष्टाचारी रेल पटरी है प्रशासन की, उसका सारा खेल नेता को मिलता सदा, कुर्सी पाकर चैन फिर जनता से वो कभी, मिलाता नहीं नैन नेता बनत…
विपदा से डरिये नहीं, करिये दो दो हाथ। अपनों का मत छोड़िये, कभी भूल कर साथ। भूल जटिलता को रखो,सीधा सरल स्वभाव। अगर चाहते हो बड़ा, जीवन में कु…
जाने नहीं ग़रीब की, उसकी कोई पीर खाई सभी ने मिलकर, उसकी सारी खीर नेता जनता से करें, वोटों का ही मोल फिर पांच साल तक रहे, जनता से वो गोल चुनाव पर नेता…
दीपावलियाँ हैं सजी , घोर अमा की रात । उतरे नभ से जिस तरह, तारों की बारात ।। इक दूजे को दे रहे, बधाइयां , आशीष । मंगलमय हो पर्व यह बरसे लक्ष्मी ईश !…
देह-दान दीपक करे,जले वर्तिका संग । परहित पर उपकार के,अपने-अपने ढंग ।। दीपक माटी का जना,ना निर्धन न अमीर । सूफ़ी के पैग़ाम सा,है इक शाह-फ़क़ीर ।। मावस…
राम नाम है वंदगी,राम नाम जयगान। राम नाम सुख-चैन है,राम नाम उत्थान।। राम नाम में ताप है,राम नाम में साँच। राम नाम हो संग तो,नहिं आती है आँच।। राम नाम …
बीवी ने मुस्कान ले, पूछा कर मनुहार । अब के करवा चौथ पर,क्या दोगे उपहार ।। होता करवा चौथ पर,शौहर का सत्कार । करती बीवी ध्यान रख,.चँदा का दीदार ।। ऐस…
हुआ जहाँ भी युद्ध है,पढ लेना इतिहास । होता वहाँ विनाश है, होता नही विकास।। बडे बुजुर्गों का कभी, होता नही जवाब । जिनके अनुभव से बने,इक जीवंत किताब ।।…
कुर्सी पाकर ही किया, हर सपना साकार नेता की इच्छा सभी, लेती है आकार नेता के मन में बसी, बस कुर्सी की चाह पर होती उसकी नहीं, आसान यही राह नेता का जिसने…
मन अनुरागी हो गया,चैन नहीं दिन-रात 'सहज' लगे गिरने चला,अभी साख से पात जग है काली कोठरी,बन जा स्वयं उजास 'सहज' न आएगा कोई, देने तेरे …
रावण कंस जैसे यहां, आसपास ही होय इससे सदैव ही तुझे, बचकर रहना तोय विरासत में अगर मिले, तुझको रमेश पीर अपने श्रम से तू यहां, बदले खुद तक़दीर भरोसा हो …
घर आँगन की लाड़ली,खुशियाँ दे भरपूर। बेटी के हाथों सभी, हो मंगल दस्तूर ।। बेटी ही बनती सदा, नव जीवन आधार । दो-दो घर के स्वप्न को,करती है साकार।। …
डॉ. पुष्पा चौरसिया दिशा-दिशा बैरिन हुई, जब से साजन दूर। मन- उछाह ऐसा उड़ा, जैसे उड़े कपूर ।। बिन सोचे ही छेड़ती यह फगुवाई रात । जले टेसुआ डाल पर, मन …
संदीप सृजन होली की हुड़दंग में, चले व्यंग्य के तीर । कहीं गुदगुदी कर रहे, कहीं घाव गंभीर ।। नेता और चुनाव का, वर्तमान माहौल । होली रंग लपेट कर, बोल र…
अब्दुल हमीद इदरीसी अब मत हरगिज़ ढूढिये, पहले वाली बात। चाल चलन बदले सभी,बदल गये हालात। ख़ुद्दारी को भूलकर , करते हैं फरियाद। करने में कुछ भी नय…
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